जिलाधिकारी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जिस तरह से नौकरशाही को प्रोत्साहित करने की कोशिश की है, उससे हर कोई खुश नहीं है। इससे नाराज होने वालों का मानना है कि प्रशासनिक अधिकारी तो पहले ही मंत्रियों की बात नहीं सुनते, अब अगर नौकरशाह सीधे प्रधानमंत्री को रिपोर्ट करेंगे, तो पूरी मंत्रिमंडलीय प्रणाली ध्वस्त हो जाएगी। प्रधानमंत्री जिन सांसदों पर भरोसा करके उन्हें मंत्रिमंडलीय टीम का हिस्सा बनाते हैं, उनका सशक्तीकरण भी जरूरी है। इसके विपरीत ब्यूरोक्रेसी अगर सीधा प्रधानमंत्री से बात करेगी, तो मंत्रियों का कोई महत्व नहीं रह जाएगा।

कुछ वर्षों पूर्व तक बिहार का नाम आते ही लोगों के जेहन में टूटी-फूटी सड़कें, हिचकोले खाते साइकिल की रफ्तार से चलते (दौड़ते) डग्गामार वाहन, छतों पर बैठकर और दरवाजों व सीढ़ियों पर लटक कर यात्रा करती सवारियां, विद्युत आपूर्ति के अभाव में शाम से ही घने अंधकार के आगोश में समा जाने वाले गांवों व शहरों के दृश्य उभर आते थे। राजनेताओं व बाहुबलियों के संरक्षण में खुलेआम घूमते अपराधी और उद्योग धंधों के अभाव में बेरोजगार युवकों व श्रमशक्ति का अन्य प्रदेशों को पलायन यहां की विशिष्ट पहचान बनती जा रही थी। लेकिन पिछले कुछ वर्षों में बिहार ऐसा बदला कि लोग न केवल उसे मॅाडल प्रदेश मानने लगें