जनहित याचिका

विश्‍व में भारत ऐसा देश है, जहां पर बांस सबसे ज्‍यादा पाया जाता है। मगर वन विभाग कानून के तहत इसे पेड़ की कैटेगरी में दर्ज किया गया है, यही कारण है कि इसकी गैरकानूनी ढंग से कटाई पर भारत में रोक है, लेकिन क्‍या आप जानते हैं कि बांस कोई पेड़ नहीं है, बल्‍कि यह घास की ही एक प्रजाति का वंशज है।

भारत को छोड़कर बहुत से देशों में इसे घास का दर्जा प्राप्‍त है। बांस को पेड़ की कैटेगरी से हटाकर घास की कैटेगरी में शामिल करने के लिए सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका दायर की गई है। इस याचिका पर सुप्रीम कोर्ट जल्‍द ही सुनवाई करेगी।

राजनीति के अपराधीकरण के खिलाफ जारी अभियान अपने निर्णायक मोड़ पर है, लेकिन इसे अभी खत्म नहीं माना जा सकता। तब तो और नहीं, जब हमारे संसदीय लोकतंत्र की नैतिकता में लगातार गिरावट की चिंता स्पष्ट है और इस पर सार्वजनिक तौर पर चर्चा भी हो रही है। इस दिशा में सर्वोच्च न्यायालय का ऐतिहासिक फैसला 10 जुलाई, 2013 को आया, जिसमें देश की सबसे बड़ी अदालत ने जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 8 (4) को निरस्त कर दिया। इसके तहत किसी भी मामले में दोषी और कम से कम दो साल की सजा पाए सांसद या विधायक की सदस्यता खत्म हो जाएगी। साथ ही, वह छह साल तक चुनाव लड़ने के अयोग्य होगा। इस फैसल