चाय

देशभर में मिलावटी खाद्य सामग्री का धड़्ल्ले से उपयोग हो रहा है। थोड़े से फायदे के लिए मिलावट खोर ऐसे ऐसे कार्यों को अंजाम दे रहे हैं जो उपभोक्ता के न केवल जेब पर भारी पड़ रहा है बल्कि स्वास्थ संबंधी जटिलताएं भी पैदा कर रहा है। जबकि इसे रोकने के लिए जिम्मेदार विभाग व अधिकारी घोड़े बेचकर सो रहे हैं। इसी मुद्दे पर आधारित कार्टूनिस्ट पवन का यह कार्टून व्यस्था पर जबरदस्त कटाक्ष करता है।

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पिछले दिनों पहले योजना आयोग के अध्यक्ष मोंटेक सिंह अहलूवालिया ने घोषणा की कि चाय को राष्ट्रीय पेय घोषित किया जाएगा।सुनकर बहुत अजीब सा लगा ।इसमें कोई दो राय नहीं हो सकती कि चाय बहुत कमाल का पेय है। जिसके बारे में निसंकोच कहा जा सकता है – कम्बख्त छूटती नहीं मुंह से लगी हुई।लेकिन मन में सवाल उठा कि हम तो दशकों से चाय पी रहे है वह भी बिना नागा। जबतक अखबार की  गर्मागर्मा खबरों के साथ चाय का नोश न फरमाया जाए तबतक तो लगता ही नहीं कि दिन शुरू हुआ है।इसके बाद सुस्ती भगाने,नींद उड़ाने या ताजगी लाने के बहाने चाय के दौर चलते ही रहते हैं।मैं कोई अनोखा जीव नहीं हूं देश के करोड़ों

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