चंदा

केंद्रीय सरकार ने राजनीतिक दलों को सूचना के अधिकार के दायरे से बाहर रखने के लिए इस कानून में जरूरी बदलाव लाने का निर्णय अगस्त 1 को ले लिया। इससे पहले विभिन्न प्रमुख राजनीतिक दलों पर इस विषय पर आम सहमति बनती नजर आई थी कि उन्हें सूचना के अधिकार की जिम्मेदारी से मुक्त रखा जाए। इससे राजनीतिक दलों की पोल अच्छी तरह खुल गई है और देश के नागरिकों को पता चल गया है कि चाहे सत्ताधारी दल हो या विपक्षी दल, वे सभी अपने को पारदर्शिता से बचाना चाहते हैं। इससे पहले केंद्रीय सूचना आयोग ने इस बारे में तर्कसंगत फैसला दिया था कि सूचना के अधिकार के कानून के अंतर्गत सार्वजनिक प्राधिकर

जानकारी के मुताबिक पिछले पांच वर्षों के दौरान भारतीय कंपनियों ने छह बड़े राजनीतिक दलों को 4,400 करोड़ रुपये से अधिक धनराशि दान में दी है। इन दलों के नाम हैं- कांग्रेस, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा), बहुजन समाज पार्टी (बसपा), माक्र्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा), समाजवादी पार्टी और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा)। भारतीय निर्वाचन आयोग द्वारा जुटाए गए ये आंकड़े टाइम्स ऑफ इंडिया समाचार पत्र द्वारा प्रकाशित किए गए हैं। राजनीतिक दलों को जिस पैमाने पर धन की आवश्यकता होती है उस लिहाज से देखा जाए तो यह धनराशि काफी कम प्रतीत होती है। लेकिन यह याद रखना होगा कि कारोबारी घरानों द