गैंगरेप

दिल्ली गैंगरेप हादसे के बाद समाज के विभिन्न वर्गों द्वारा तमाम तरह की मांगे की जा रही हैं और सुझाव दिए जा रहे हैं। हालांकि उनमे से अधिकांश बेहद बेतुके और बेसिर पैर के भी हैं। मजे की बात यह है कि बेतुके और बेसिर पैर की मांगें और सलाह सभी पक्षों (राजनैतिक दलों, अध्यात्मिक गुरुओं, प्रशासन और प्रदर्शनकारी) की ओर से समान रूप से प्रस्तुत किए जा रहे हैं। कोई लड़कियों को मर्यादा में रहने की बात कर रहा है तो कोई उन्हें सलीकेदार कपड़े पहनने की सलाह दिए जा रहा है। कोई घटना के लिए बलात्कारियों और लड़की दोनों को ही बराबर का दोषी बताते हुए ताली एक हाथ से न बजने की कहावत याद दिला रहा है

दिल्‍ली गैंग रेप के बाद कोई भारत-इंडिया में भेद को इसका कारण बता रहा है, कोई बॉलिवुड को गाली दे रहा है, कोई अश्‍लीलता तो कोई महिलाओं के कपड़े और उसकी जीवनशैली पर ऊंगली उठा रहा है, कोई पश्चिमीकरण को इसका दोषी ठहरा रहा है, कई खुद को महिला स्‍वतंत्रता के पैरोकार साबित करने में जुटे हैं। सच तो यह है कि अभी ये खुद ही समकालीन मनुष्‍य नहीं हैं। आइए जानते हैं इस सदी के प्रबुद्ध चेतना ओशो समकालीन मनुष्‍य किसे मानते हैं....