खरीद फरोख्त

हमारी संस्कृति की अनेक खूबियों में से एक है उसका उदारवाद। हमारे ग्रंथों ने हमें सभी लैंगिक समूहों और उनकी यौन अभिरुचियों का सम्मान करने की सीख भी दी है, फिर चाहे वे हमसे भिन्न ही क्यों न हों। लेकिन इसके बावजूद आज भी हम भिन्न यौन अभिरुचियों वाले व्यक्तियों के प्रति पर्याप्त उदार और सहिष्णु नहीं हो पाते। उभयलिंगियों को तो हमने हाशिये का उपेक्षित समुदाय बना डाला है। बर्बर देशों की तरह हम 'व्यभिचारियों' को पत्थर मार-मारकर मार तो नहीं डालते, लेकिन एक तरह से उनका सामाजिक बहिष्कार जरूर कर देते हैं। उन्हें अन्य तरीकों से यंत्रणा दी जाती है और वे हमारी घृणा और हिकारत का वि