कोल्ड स्टोरेज

टमाटर और प्याज समेत खाद्य पदार्थो की बेतहासा बढ़ती कीमतों को लेकर उपभोक्ता परेशान हैं, परंतु लोग भूल रहे हैं कि कुल मिलाकर कृषि उत्पादों का आयात-निर्यात उपभोक्ताओं के हित में है। देश में खाद्य तेल और दाल की उत्पादन लागत ज्यादा आती है। इनका भारी मात्र में आयात हो रहा है, जिनके कारण इनके दाम नियंत्रण में हैं। यदि हम विश्व बाजार से जुड़ते हैं तो हमें टमाटर, प्याज के दाम ज्यादा देने होंगे, जबकि तेल और दाल में राहत मिलेगी। मेरी समझ से उपभोक्ता के लिए तेल और दाल ज्यादा महत्वपूर्ण हैं। अत: टमाटर और प्याज के ऊंचे दाम को वहन करना चाहिए।

मल्टी ब्रांड रिटेल में 51 प्रतिशत विदेशी निवेश की इजाजत के बाद बवंडर सा मचा हुआ है। इंश्योरेंस सेक्टर में विदेशी निवेश की सीमा 26 प्रतिशत से बढ़ाकर 49 प्रतिशत होने पर अलग बवाल है। दो एकदम विपरीत ध्रुवों की राय सामने आ रही है। सरकारी पक्ष कह रहा है कि विदेशी निवेश आने से रोजगार बढ़ जायेगा, उपभोक्ताओं का भला होगा। कोल्ड स्टोरेज बनेंगे। फल अन्न की बरबादी रुकेगी। सरकार विरोधी पक्ष का कहना है कि भारत तबाह हो जायेगा, रोजगार खत्म हो जायेंगे। उपभोक्ता लुट जायेंगे। दोनों ही अतिवादी दृष्टिकोण हैं, रास्ता कहीं बीच से होकर जाता है।

Author: 
आलोक पुराणिक