कोयला घोटाला

आखिरकार केंद्र सरकार कोयला खदानों के आवंटन के मामले में यह मानने के लिए विवश हुई कि उससे किसी न किसी स्तर पर गलती हुई, लेकिन किसी मामले में केवल सच को स्वीकार करना पर्याप्त नहीं। सच्चाई स्वीकार करने से समस्या का समाधान नहीं होता। कोयला खदानों के आवंटन में गलती के लिए जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही तय की जानी चाहिए, क्योंकि कोयला खदानों का आवंटन कुछ ज्यादा ही मनमाने तरीके से किया गया और इसी के चलते इस प्रक्रिया ने एक घोटाले का रूप ले लिया।

 

कांग्रेस कार्यकर्ताओं के कहर का शिकार हुआ एक रेस्तरां। आम से खास तक केंद्र सरकार में हो रहे रोज-रोज घोटाले और तमाम टैक्स से त्रस्त है। सभी लोग अलग अलग तरीके से अपना गुस्सा व्यक्त कर रहे हैं। लेकिन मुंबई में एक रेस्तरां के मालिक ने अपने रेस्तरां के बिल को ही गुस्सा व्यक्त करने का जरिया बना डाला। फिर क्या था, कांग्रेसी कार्यकर्ता उग्र हुए और रेस्तरां बंद करा दिया। बंद होते ही रेस्तरां मालिक की अक्ल खुली और विरोध के इस साधन को कहा-बाय, बाय।

कोयला घोटाले से पस्त सरकार, पिछले एक पखवाड़े के भीतर लंबे समय से अपेक्षित कुछ सुधारों पर आगे बढ़ी है। इनमें मल्टी ब्रांड रिटेल और विमानन क्षेत्र में विदेशी प्रत्यक्ष निवेश की अनुमति शामिल है। एफडीआई के मुद्दे पर देश में तेज प्रतिक्रिया हुई और “वाद विवाद के लिए तैयार भारतीयों” के बीच यह हमेशा बनी रह सकती है।