किसान

किसानों को कृषि क्षेत्र में कुछेक कंपनियों का एकाधिकार न हो, कानून में ऐसे प्रावधान कराने के लिए आंदोलन करना चाहिए

प्रतिस्पर्धा युक्त मुक्त बाजार से ही किसानों को मिलेगा लाभ

सोचिए कि छूट वाली कीमत पर चिप्स का पैकेट खरीदने के लिए आपको गिरफ्तार कर लिया जाए। आपको यह उदाहरण इसलिए दिया जा रहा है ताकि आपको इस तरह के एक मामले को समझने में आसानी हो। दरअसल पंजाब विधानसभा में पिछले हफ्ते तीन विधेयक पारित किए गए जो इस तरह की गिरफ्तारी का प्रावधान करते हैं, हालांकि यह गिरफ्तारी चिप्स खरीदने पर नहीं होगी बल्कि छूट वाली कीमतों पर गेहूं और धान की खरीद पर होगी। ये विधेयक उन नये कृषि कानूनों के खिलाफ पारित किए गए जिन्हें हाल में केंद्र सरकार लेकर आयी। पंजाब सरकार का कहना है कि इन विधेयकों से किसानों के हितों की रक्षा होगी और उनके

क्या कृषि ऋण वास्तविक लाभार्थी तक पहुंच रहा है? यह सवाल देश के सर्वोच्च बैंक ने पूछा है। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने कृषि ऋण की समीक्षा के लिए गठित आंतरिक कार्य समूह (आईडब्ल्यूजी) की ताजा रिपोर्ट में पाया है कि कुछ राज्यों में इस क्षेत्र को आवंटित ऋण उनके कृषि सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) से अधिक था। इससे ऐसे संकेत मिले हैं कि  कृषि ऋण का बेजा इस्तेमाल वास्तविक उद्देश्यों के लिए नहीं हो रहा है। केरल, तमिलनाडु, तेलंगाना और पंजाब जैसे राज्य इसी श्रेणी में आते हैं।

आखिर इस महिला को उस मराठी कहावत की याद दिलाने की जरूरत क्यों पड़ रही है जिसमें कहा जाता है कि 'बैल आजारी पड़ला तार चलेल, बाइल आजारी नको पड़ैला' यानि कि बैल अगर बीमार पड़ जाए तो फिर भी खेती हो सकती है लेकिन घरवाली अगर बीमार पड़ जाए तो काम नहीं चल सकता..!

क्यों कहना पड़ रहा है कि जो युवक अपनी आजीविका के लिए खेती को चुनता है आज उसका विवाह होना मुश्किल हो जाता है..

- आजादी.मी

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हाल ही में लोक सभा में एक बहस के दौरान कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने यह टिप्पणी की थी कि प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी सूट-बूट वालों की सरकार चलाते हैं, जो अपने अमीर करीबियोँ का समर्थन करती है और गरीब लोगोँ को नजरअंदाज करती है।

Author: 
स्वामीनाथन अय्यर

वर्ष 2012 को संयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा सहकारिता के अंतराष्ट्रीय वर्ष के रूप में मनाया जा रहा है। इससे संबंधित सबसे बड़ा सम्मेलन कनाडा के क्यूबेक सिटी में हाल ही में 8 से 11 अक्टूबर के बीच सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। विश्व स्तर पर विभिन्न तरह के सहकारी उपक्रमों के लगभग 100 करोड़ सदस्य हैं, जबकि लगभग 10 करोड़ लोगों को रोजगार मिला हुआ है।

वर्ष 2013 की शुरूआत में जीएम फसलों के महत्व को लेकर प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने सार्वजनिक तौर पर अपने विचार देश के सामने रखे थे। कुछ उसी तरह वर्ष 2014 की शुरूआत भी एग्रीबायोटेक उद्योग के लिए खुशनुमा है। हमारे तमाम वैज्ञानिक प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह के स्पष्ट वक्तव्य से उत्साहित हैं। अनुवांशिक रूप से परिवर्तित जीएम फसलों के लिए एक सक्षम नीति के लिए अपनी सरकार की प्रतिबद्धता दर्शाते हुए डॉ.

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