काला धन

आखिरकार कोई तो बुद्धिमानी से बोला। अब तक तो हमने काले धन को लेकर हर किसी को आक्रोश व्यक्त करते हुए ही देखा, लेकिन किसी ने व्यावहारिक समाधान नहीं सुझाया। बोफोर्स घोटाले से इसकी शुरुआत हुई थी और उसके कारण राजीव सरकार को सत्ता से बेदखल होना पड़ा। फिर तो हर किसी को यह समझ में आ गया कि काला धन राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी की प्रतिष्ठा को खत्म करने का एकदम कारगर उपाय है। काले धन को लेकर शेखी बघारी जानेे लगी। एनडीए सरकार तो एक कदम आगे जाकर काले धन पर लगाम लगाने के लिए सच में काले कानून ही ले आई।
सोने की तस्करी में जबर्दस्त इजाफा दर्ज किया जा रहा है। 2014-15 में अवैध ढंग से लाया जा रहा 1000 करोड़ रुपये मूल्य का (3500 किलोग्राम) सोना जब्त किया गया। दो साल पहले की तुलना में यह मात्रा लगभग दस गुनी है।
 

राजनीतिक दलों को सूचना अधिकार (आरटीआइ) के दायरे में लाने के केंद्रीय सूचना आयोग (सीआइसी) के हालिया फैसले से यह पुष्टि हो गई है कि अधिकांश राजनीतिक दल धनराशि जुटाने, पार्टी टिकट देने और इस प्रकार के अन्य अंतर्दलीय मामलों में पारदर्शिता और जवाबदेही के खिलाफ हैं। सबसे अधिक निराशा यह देखकर हुई कि कभी खुद को अलग तरह की पार्टी बताने वाली भारतीय जनता पार्टी भी घोटालों की दागी कांग्रेस की राह पर चल रही है और आदेश की वैधानिकता पर सवाल उठाकर कांग्रेस को बचाने का प्रयास कर रही है। देश की सबसे पुरानी राजनीतिक पार्टी कांग्रेस ने सीआइसी के आदेश को एडवेंचरिस्ट बताया और यह अजी