कारोबार

मुक्त बाजार अर्थव्यवस्था के आलोचक कहते हैं कि यह नितांत अनैतिक है क्योंकि यह लालच पर आधारित है। लालच- लाभ कमाने का भद्दा प्रेरक। क्या यह आलोचना वैध है? इस क्यों को समझना जरूरी है क्योंकि जन नैतिकता समाजवाद के कहीं बहुत नीचे दब गयी है। प्रतिदिन घोटाले होते हैं। चोरों (नेताओं) को आर्थिक स्वतंत्रता को अनैतिक कहने की अनुमति नहीं मिलनी चाहिए।

एक दूसरे के पड़ोसी होते हुए भी भारत और पाकिस्तान के बीच कारोबार काफी सिमटा रहा है। कुछ समय पहले तक दक्षिण एशिया में श्रीलंका भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार था, अवामी लीग सरकार के कार्यकाल में अब बांग्लादेश उससे थोड़ा आगे निकल गया है। पाकिस्तान इन दोनों से पीछे है। इसकी वजह भारत से उसके रिश्तों में आते रहे उतार-चढ़ाव के अलावा कारोबार के लिए ढांचागत सुविधाओं की कमी भी है। दोनों के बीच बहुत सारा व्यापारिक लेन-देन तीसरे देश के जरिए होता रहा है, जो कि दोनों के हित में नहीं है। देर से ही सही, अब आपसी व्यापार की संभावनाएं बढ़ाने की कोशिश चल रही है।

हाल ही में वित्तमंत्री पी. चिदंबरम थकाऊ विदेश दौरे से वापस लौटे हैं, जहां उन्होंने भारतीय अर्थव्यवस्था की सुनहरी तस्वीर पेश करते हुए मौजूदा और संभावित निवेशकों को भारत के प्रति लुभाते हुए कहा कि भारत व्यापार के लिए आकर्षक गंतव्य है। उन्होंने रेटिंग एजेंसियों को भी लुभाने का प्रयास किया कि कहीं वे भारत की रेटिंग न गिरा दें। वह अपने मकसद में कितने कामयाब हुए यह तो आने वाले महीनों में ही पता चलेगा जब उनके मंत्रालय को अगले आम चुनाव की तैयारियों के तहत लोकप्रिय राजनीति का बोझ उठाना पड़ेगा।

हम गरीब क्यों हैं? हमारा मुल्क विश्व का सबसे बड़ा लोकतंत्र है, जहां दुनिया के ज्यादातर गरीब भी बसते हैं। लिहाजा कोई भी व्यक्ति यही सोचेगा कि यह सवाल ही हर राजनीतिक बहस के केंद्र में होगा। वह यह भी सोच सकता है कि हम इस तरह के विषयों पर गहन व दिलचस्प बहस-परिचर्चाएं करते होंगे कि गरीबी के क्या कारण हैं ? अमीर बनने के लिए देश के तौर पर हम क्या कर सकते हैं ? तथा दुनिया के बाकी हिस्सों में इस दिशा में क्या कारगर कदम उठाए जा रहे हैं ?