कश्मीर

जब भी वापस आती हूं वतन किसी विदेशी दौरे के बाद, तो कुछ दिनों के लिए मेरी नजर विदेशियों की नजरों जैसी हो जाती है। बिल्कुल वैसे, जैसे आमिर खान के नए टीवी इश्तिहार में दर्शाया गया है। मुझे भी जरूरत से ज्यादा दिखने लगती हैं भारत माता के 'सुजलाम, सुफलाम' चेहरे पर गंदगी के मुहांसे, गंदी आदतों की फुंसियां और गलत नीतियों के फोड़े।

बिहार के मुख्य मंत्री नीतीश कुमार और कांग्रेस एक दूजे की ओर तक रहे हैं। चिदंबरम बिहार को विशेष राज्य का दर्जा देने के लिए मानकों में कुछ बदलाव करने का भरोसा दे चुके हैं, जिसकी मांग नीतीश लंबे समय से करते रहे हैं। 17 मार्च को नीतीश ने रामलीला मैदान में अपनी रैली में एक बार फिर यह मांग उठाई। नीतीश कुमार लोकसभा चुनावों में विशेष राज्य के दर्जे की उपलब्धि को भुनाना चाहते हैं। निश्चित रूप से वह इतने भोले नहीं हैं जो यह मानकर चल रहे हों कि यह दर्जा बिहार का कायाकल्प कर देगा और निकट भविष्य में बिहार आर्थिक पिछड़ेपन से उबर जाएगा।

कश्मीर में ताजा संकट ने उन प्रेतों को फिर जगा दिया है जिन्हें हमने सोया मन लिया था ! मेरे भीतर एक उदार आवाज उठती है, जो कहती है कि लोगों को यह चुनने का हक है कि जैसा जीवन वह जीना चाहते है और किस मुल्क में रहना चाहते है ! इसलिए घाटी के चालीस लाख लोगों को उनके  इच्छा के विरुध्द भारत में रहने के लिए बाध्य नहीं किया जाना चाहिए ! उदारवादी इसे आत्म- निर्णय का अधिकार कहते है ! इसी सिध्दांत के बल पर हमने ब्रिटेन से आजाद होने की लड़ाई लड़ी थी और यही अब हमें कश्मीर पर लागू करना चाहिए ! दूसरी ओर, उस देश कि पुकार भी मेरे भीतर उठती है जिसने पिछले साठ सालों से मुझे पाला-पोसा है !

Category: 

मशहूर लेखिका और बुकर प्राइज़ विजेता अरुंधती रॉय का हाल ही में श्रीनगर में कश्मीर के ऊपर दिया हुआ बयान काफी विवादस्पद साबित हुआ. नाराज़ लोगों नें उन्हें देशद्रोह के अपराध में दण्डित करने की पुरजोर वकालत की. अरुंधती का विवादों में पड़ना कोई नयी बात नहीं है. देश से जुडे कई संवेदनशील मुद्दों पर अपने क्रन्तिकारी विचारों को प्रगट कर वो पहले भी घेरे में आ चुकी हैं.