एक्ट

क़ानून क्या है? इस बारे में ऑस्टिन का कथन है कि क़ानून संप्रभु की आज्ञा है। राज्य के सन्दर्भ में अगर बात करें तो राजतंत्र वाली व्यवस्था में राजा का आदेश ही क़ानून होता था। शासन की लोकतांत्रिक व्यवस्था में भी क़ानून की परिभाषा कमोबेस वही है। सवाल है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में क़ानून लोकहित के लिए हैं या लोकहितों को ही क़ानून के मापदंड पर रखकर देखना होगा?

भारतीय शिक्षा  नीति के क्षेत्र में – द रिपोर्ट आफ द रिव्यू कमेटी आन द दिल्ली स्कूल एजुकेशन एक्ट एंड रूल्स,1973  जैसी प्रगतिशील रपट शायद देश  को कभी देखने को नहीं मिली । इस रपट का श्रेय इन तीन खंड़ों की मसौदा कमेटी की अध्यक्ष और दिल्ली की  पूर्व मुख्य सचिव शैलजा चंद्र को है।