एकाधिकार

दुनिया आशावाद और निराशावाद में बंटी हुई है। आर्थिक आशावादियों का विश्वास है कि यदि सरकार बुनियादी ढांचे के क्षेत्र में निवेश करे और उद्यमियों के समक्ष मौजूद बाधाओं को दूर करे तो बड़ी तादाद में नौकरियों के सृजन के साथ-साथ अर्थव्यवस्था का विकास संभव होगा। इससे कर राजस्व बढ़ेगा, जिसका निवेश गरीबों पर किया जा सकेगा। यदि कुछ दशक तक हम इस नीति का अनुकरण करें तो हमारा देश धीरे-धीरे मध्य वर्ग में तब्दील हो जाएगा। दूसरी ओर निराशावादियों की भी कुछ चिंताएं हैं, जिनमें असमानता, क्रोनी कैपिटलिज्म, पर्यावरण का क्षरण, शहरीकरण की बुराई आदि शामिल हैं। ये समस्

Author: 
गुरचरण दास

केंद्र सरकार के एक कार्यसमूह द्वारा देश के डाक सेवा क्षेत्र में बेहतर परिणाम के लिए डाक विभाग के एकाधिकार को समाप्त करने का सुझाव दिया गया है। डाक क्षेत्र में सेवा की गुणवत्ता बढ़ाने के संदर्भ में कार्यसमूह द्वारा दिया गया यह सुझाव कई मायनों में स्वागत योग्य है। कार्य समूह की इस क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा को और बढ़ाने और डाक विभाग के एकाधिकार को खत्म करने की सिफारिश इसलिए भी सराहनीय है क्योंकि इस संदर्भ में जो कानून चला आ रहा है वह अंग्रेजी शासन काल का है और ११० साल से भी अधिक पुराना है। वैश्विकरण के दौर में यह एक सर्वमान्य तथ्य है कि सेवा के किसी क्षेत्र में वांछनीय गुणवत्