उर्वरक

आमतौर पर सब्सिडी इसलिए दी जाती है कि समाज के कमजोर वर्र्गो की जरूरी सेवाओं तक पहुंच बन सके, लेकिन व्यावहारिक धरातल पर इसका उल्टा हो रहा है। कृषि के लिए डीजल पर दी जाने वाली सब्सिडी का फायदा लग्जरी गाडि़यों वाले उठा रहे हैं। इसी तरह यूरिया पर दी जाने वाली सब्सिडी का दुरुपयोग हो रहा है। पिछले दिनों आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (सीसीईए) ने यूरिया की कीमतें ढाई रुपये प्रति बोरी बढ़ाने के साथ ही यूरिया को नियंत्रणमुक्त कर इसके तहत दी जाने वाली सब्सिडी को सीधे किसानों के खाते में डालने का फैसला किया। फिलहाल इसे प्रायोगिक तौर पर देश के 10 जिलों में लागू किया जाएगा। प्रयोग

लकड़ी चाहे कितनी ही मजबूत क्यों न हो, अगर उसमें घुन लग जाए तो अच्छी भली मजबूत लकड़ी भी खोखली हो जाती है। भारतीय लोकतंत्र के लिए सब्सिडी भी किसी घुन की तरह ही है। ऊपर से सब्सिडी भले हानिकारक न दिख रही हो, लेकिन वास्तविकता यही है कि यह लोकतंत्र को खोखला कर रही है। सब्सिडी को जिस तबके के लिए फायदेमंद बताया जाता है, यह उस तबके का भला नहीं करती। यह तो बिचौलियों के लिए मलाई जैसी होती है। सब्सिडी जन कल्याण का छलावा भर है। भारत में लोगों को लगता है कि यहां जो सब्सिडी की व्यवस्था लागू है, वह गरीबों की हितैषी है, जबकि हकीकत यह है कि सरकार जितना सब्सिडी देती है, उससे ज्यादा राशि गरी