उद्यमी

देश के पांच राज्यों में लोकतंत्र का पर्व धूमधाम से मनाया गया। इस दौरान चुनावी रणभूमि में अपना भाग्य आजमाने वाले नेताओं ने नियमानुसार अपनी चल-अचल संपत्ति का ब्यौरा भी दिया। समस्या यह है कि संपत्ति की जानकारी मिलते ही हंगामा शुरू हो जाता है कि फलां उम्मीदवार के पास इतनी संपत्ति है, कहां से उसके पास इतना पैसा आ गया? जिसके पास संपत्ति अधिक दिखती है, नैतिकतावादी उसे घेरने लगते हैं, जैसे उसने चोरी की हो, घोटाला किया हो या लूटकर संपत्ति बनाई हो। यह क्या बात हुई?

विश्व को भारत में संभावनाएं दिखाई दे रही है। वो हमारे देश को बाजार की तरह देखते हैं। उन्हें यहां 1 अरब से अधिक खरीददार दिखाई देते हैं। जहां वे अपने उत्पादों को बेच सकते हैं। हमारी मानवीय संपदा विश्व के लिए आकर्षण का केंद्र है। यही कारण है कि बहुराष्ट्रीय कंपनियां हमारे देश में व्यवसाय के लिए आ रही है। उन्हें, यहां बेहतर आर्थिक भविष्य की संभावनाएं दिखती हैं। जबकि हम सवा सौ करोड़ लोग पूरी दुनिया के लिए उत्पादन करने में सक्षम हैं। आगे आने वाले समय में भारत को बाजार नहीं, उत्पादक देश बनना है। इसके लिए हमें अपने युवा शक्ति में भरपूर संभावनाएं दिखत

दलित इंडियन चैंबर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (डिक्की) की ओर से बीते 6 जून को एक नया वेंचर कैपिटल फंड शुरू किया गया। इस फंड का मकसद है दलितों और आदिवासियों द्वारा चलाई जा रही कंपनियों में निवेश के लिए निवेशकों से 500 करोड़ रुपये जुटाना। कृपया इस पहल को सकारात्मक कार्रवाई (अफर्मेटिव एक्शन) के नाम पर उठाए गए एक और सदाशयी कदम की तरह न देखें।