उत्तराखंड

शिक्षा जीवन की ऐसी कड़ी है, जहां से तरक्की और खुशहाली के सारे रास्ते खुलते हैं। सामाजिक, सांस्कृतिक, राजनीतिक आर्थिक उन्नति का आधार भी शिक्षा ही है, लेकिन यही शिक्षा अगर मजाक बनकर रह जाए तो क्या कहिएगा?

तेलंगाना के गठन के फैसले के साथ हमने जो शुरू किया है, वह इतना  खतरनाक है कि यदि इसे अभी नहीं रोका गया तो हम आने वाले वक्त में बहुत पछताएंगे। धमकाकर नया राज्य बनाने के लिए मजबूर करने की कोशिश के नतीजे अच्छे नहीं होंगे।

उत्तराखंड में जो भयानक नुकसान हमने पिछले सप्ताह देखा, उसके पीछे छिपे हैं कई सवाल, जिन्हें हम सिर्फ आपदा आने के समय ही पूछते हैं। बला टल जाती है, तो हम भी उन सवालों को पूछना बंद कर देते हैं। इसलिए हम आज तक समझ नहीं पाए हैं विकास और पर्यावरण का नाजुक रिश्ता और न ही हमारे शासकों ने समझने की कोशिश की है कि विकसित देशों में विकास के बावजूद पहाड़ क्यों सुरक्षित हैं, नदियां क्यों साफ हैं।

बिहार के मुख्य मंत्री नीतीश कुमार और कांग्रेस एक दूजे की ओर तक रहे हैं। चिदंबरम बिहार को विशेष राज्य का दर्जा देने के लिए मानकों में कुछ बदलाव करने का भरोसा दे चुके हैं, जिसकी मांग नीतीश लंबे समय से करते रहे हैं। 17 मार्च को नीतीश ने रामलीला मैदान में अपनी रैली में एक बार फिर यह मांग उठाई। नीतीश कुमार लोकसभा चुनावों में विशेष राज्य के दर्जे की उपलब्धि को भुनाना चाहते हैं। निश्चित रूप से वह इतने भोले नहीं हैं जो यह मानकर चल रहे हों कि यह दर्जा बिहार का कायाकल्प कर देगा और निकट भविष्य में बिहार आर्थिक पिछड़ेपन से उबर जाएगा।