इज्जत

प्रायः समाज शास्त्रियों, समता व समानता के पुरोधाओं और समाजसेवी राजनेताओं को शहरों की मलिन बस्तियों व झुग्गी झोपड़ियों की बढ़ती तादात पर अपने घड़ियाली आंसू बहाते और वहां रहने वाले लोगों के उद्धार के लिए भविष्य के वादों की घुट्टी पिलाते हम सबने सुना और देखा होगा। शहर की मलिन बस्तियों से संबंधित जब कोई रिपोर्ट किसी एनजीओ, कमेटी अथवा जनगणना आयोग द्वारा प्रकाशित की जाती है, अलग-अलग वर्ग द्वारा अपने अपने ढंग से इसे अमानवीय, यातना व नर्क जैसी उपमाओं से नवाजा जाना शुरू कर दिया जाता हो यहां तक कि शहरीकरण को ही इस पूरे वाकए के लिए दोषी साबित करने की भी होड़ शुरू हो जाती है। मजे की

Author: 
स्वामीनाथन अय्यर