इंडिया इंटरनेशनल सेंटर

राष्ट्रकवि मैथलीशरण गुप्त द्वारा जंग-ए-आजादी के समय लिखी गई कविता “अबला जीवन तेरी हाय यही कहानी, आंचल में है दूध और आंखों में पानी” आज भी उतनी ही प्रासंगिक है जितनी कि उस दौर में हुआ करती थी। महिलाओं की स्थिति के बाबत कार्यरत अंतर्राष्ट्रीय संस्था ‘वुमन्स रीजनल नेटवर्क’ (डब्लूआरएन) द्वारा प्रस्तुत शोधपत्र तो कम से कम यही प्रदर्शित करता है। संस्था द्वारा अफगानिस्तान, पाकिस्तान और भारत के कॉन्फ्लिक्ट जोन (संघर्ष वाले क्षेत्रों) में निवास करने वाली महिलाओं की स्थिति का सैन्यीकरण, सुरक्षा और भ्रष्टाचार जैसे तीन महत्वपूर्ण तथ्यों के आधार पर आंकलन किया गया।

जाने माने अर्थशास्त्री व स्तंभकार गुरचरन दास ने देश में शहरी विकास का पर्याय बन चुके गुड़गांव शहर की वर्तमान तस्वीर के लिए निजी प्रयासों को जिम्मेदार बताते हुए उद्यमियों और उद्योगपतियों के प्रयासों की जमकर तारीफ की है। उन्होंने विकास के इस क्रम को अपनी नई किताब “इंडिया ग्रोज एट नाइट” में बतौर अध्याय शामिल करते हुए देश में निजी प्रयासों के तहत विकास की अवधारणा की जरूरत पर बल दिया है। किताब में फरीदाबाद व गुड़गांव के विकास की तुलनात्मक विवेचना करते हुए गुरचरण ने कहा है कि कुछ दशक पूर्व तक गुड़गांव उजाड़ और विकास से कोसो दूर छोटा सा शहर हु