आलोचना

 

हम भारतीय असहज मुद्दों से बचने में उस्ताद  हैं। असहज मामलों पर चर्चा करने के बजाय हम ढोंगी और झूठा बनना ज्यादा पसंद करते हैं। ऐसा ही एक मुद्दा है शराब के सेवन का, जिस पर चर्चा से परहेज करना हम अच्छी तरह सीख चुके हैं। हमसे उम्मीद की जाती है कि हम शराब से संबंधित हर चीज की सार्वजनिक रूप से आलोचना करेंगे।

देश में इन दिनों बेवजह बात का बतंगड़ बनाने की एक परंपरा सी चल पड़ी है। किसी भी सुझाव, विचार अथवा प्रस्ताव के अच्छे बुरे पहलुओं पर विचार किए बगैर ही बेवजह उस पर विवाद पैदा कर दिया जाता है। मजे की बात यह है कि इस परंपरा का निर्वहन, केवल सत्तापक्ष द्वारा विपक्ष और विपक्ष द्वारा सत्तापक्ष की खिंचाई के लिए ही नहीं बल्की अपने लोगों की भर्त्सना के दौरान भी बखूबी किया जा रहा है। केंद्रीय मानव संसाधन राज्यमंत्री शशि थरूर द्वारा एंटी-रेप लॉ के मद्देनजर एक दिन पूर्व दिए गए सुझाव के संदर्भ में भी इसी परंपरा का निर्वहन देखने को मिल रहा है। स्वयं थरूर की पार्टी कांग्रेस के लोग ही उनके