आर्थिक प्रगति

हाल में हुए विधानसभा चुनाव में आम आदमी महंगाई की ही शिकायत कर रहा था। टीवी पर लोग आलू, प्याज, घी और दाल की कीमतें बताते नजर आते थे। हालांकि चुनावी पंडित हमेशा का चुनाव राग ही गा रहे थे, लेकिन कांग्रेस की हार में भ्रष्टाचार से ज्यादा महंगाई का हाथ रहा। हाल में महंगाई कुछ कम हुई हैं, लेकिन सभी दलों के लिए यह चेतावनी है कि आम आदमी महंगाई के दंश को भूलने वाला नहीं है और यह आगामी आम चुनाव में नजर आएगा।

Author: 
गुरचरण दास

देश-विदेश में तमाम आलोचना के बाद संप्रग सरकार ने आखिरकार अपनी दूसरी पारी में बड़े आर्थिक सुधारों की शुरुआत करने का साहस दिखाया। मनमोहन सिंह सरकार की ओर से यह साहस तब दिखाया गया जब देश में आर्थिक प्रगति की रफ्तार लगातार घटती जा रही है और इसके चलते विश्व में भारत की साख भी प्रभावित हो रही है। पिछले दिनों योजना आयोग के उपाध्यक्ष मोंटेक सिंह अहलूवालिया ने जब सकल घरेलू उत्पाद यानी जीडीपी में वृद्धि दर महज पांच फीसदी ही रहने की संभावना व्यक्त की थी तभी यह महसूस किया जाने लगा था कि बड़े आर्थिक सुधारों में देरी बहुत भारी पड़ने जा रही है। सरकार के पास इसके अलावा अन्य कोई