आयन रैंड

रूस में पैदा हुई विख्यात अमेरिकी उपन्यासकार, दार्शनिक, नाटककार व 'द फाउंटेनहेड (1943)', 'एटलस श्रग्ड (1957)' आदि जैसे बेस्ट सेलर की रचइता 'आयन रैंड' [2 फरवरी 1905 - 6 मार्च, 1982] की कल अर्थात 2 फरवरी को 111वां जन्मदिवस था। उनके एक प्रसिद्ध कथन को याद करते हुए इस महान उदारवादी चिंतक को हमारी श्रद्धांजलि..

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कल अर्थात 2 फरवरी को आयन रैंड का 110वां जन्मदिवस था। 2 फरवरी, 1905 को रूस के सेंट पीटर्सबर्ग में जन्मी आयन रैंड ने छह वर्ष की उम्र में खुद ही पढ़ना लिखना सीख लिया था। दो साल बाद उन्हें बच्चों की एक फ्रांसीसी मैगजीन में अपना पहला काल्पनिक (फिक्शनल) हीरो मिल गया। हीरो की एक ऐसी छवि जो ताउम्र उनके दिलो-दिमाग पर चस्पां रही। नौ वर्ष की उम्र में उन्होंने कल्पना आधारित लेखन को ही अपना कैरियर बनाने का फैसला कर लिया। रूसी संस्कृति के रहस्यवाद और समूहवाद की मुखर विरोधी आयन खुद को यूरोपियन लेखकों की तरह मानती थीं, खासतौर पर अपने सबसे पसंदीदा लेखक विटर ह्यूगो से सामना होने के बाद।

व्यवसाय में सरकारी "सहायता" उतना ही त्रासदीपूर्ण है जितना कि सरकारी "उत्पीड़न"...सरकार केवल एक ही तरीके से राष्ट्र की समृद्धि में अपना योगदान दे सकती है, और वह है स्वयं को इससे दूर रखना।
 
- आयन रैंड

द फाउंटनहेड  १९४३ में अमेरिकी उपन्यासकार आयन रैंड द्वारा लिखित एक अंग्रेज़ी उपन्यास है जो कुछ समीक्षकों के अनुसार विश्व के सबसे प्रभावशाली उपन्यासों में से एक है। मई २००८ तक दुनिया भर में इसकी ६५ लाख से ज़्यादा प्रतियाँ बिक चुकी थीं और अभी भी हर वर्ष इसकी औसतन १ लाख प्रतियाँ बिकती हैं।दर्शनशास्त्र के नज़रिए से यह किताब एक बहुत ही महत्वपूर्ण व्यक्तिवादी कृति मानी जाती है जिसमें उस विचारधारा की तटस्थवाद (objectivism, ऑब्जेक्टिविज़्म​) शाखा की बुनियाद रखी गई।

ईगो पालना और स्वार्थी होना अच्छा नहीं माना जाता, मगर आयन रैंड की मानें तो यही दो गुण इंसानी तरक्की की चाबी हैं। रैंड ने 1943 में अपना मशहूर नॉवेल द फाउंटेन हैड लिखकर ऑब्जेक्टिविज्म की थअरी को स्थापित किया। नॉवेल का नायक हावर्ड रोर्क एक आदर्शवादी युवा है, जो पेश से आर्किटेक्ट है। अपने विचारों से समझौता करने के बजाय वह संघर्षों का रास्ता चुनता है। परंपरावादी दृष्टिकोण से इमारतें बनाने से उसे सख्त चिढ़ है। पूरे नॉवेल में हावर्ड के इर्द-गिर्द के किरदार एक दार्शनिक निष्पत्ति देने वाला कथानक बुनते हैं। इस नॉवेल की पांडुलिपि को 12 प्रकाशकों ने खारि

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