आबादी

जब हम जैसे लोग यह कहते हैं कि - जनसंख्या समष्द्धि का कारण है, केवल मनुष्य ही ऐसी प्रजाति है जो धन पैदा कर सकती है और नक्शे पर  अंकित प्रत्येक बिन्दु,  जनसंख्या की दृष्टि से सघन है और ज्यादा सम्पन्न है,  तो उनके जैसे (तथाकथित समाजवादी) लोग प्राकृतिक संसाधन की कमी की बात करते हैं। उनका तर्क है कि पृथ्वी पर संसाधन सीमित हैं तथा यदि ज्यादा लोग होंगे, तो ये जल्दी समाप्त हो जायेंगे। प्राकृतिक संसाधनों की कमी की समस्या का जूलियन साइमन ने गहनतापूर्वक अध्ययन किया। उसने दीर्घकालिक मूल्य सम्बन्धी प्रवृत्तियों का अध्ययन किया और इससे बड़े रो

संयुक्त राष्ट्र ने तेजी से बढ़ती जनसंख्या और शहरीकरण के बाबत नई रिपोर्ट जारी की है। रिपोर्ट के मुताबिक दिल्ली आबादी के लिहाज से दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा शहर बन गई है। दुनिया भर में शहरीकरण की संभावनाओं से जुड़ी 2014 की इस रिपोर्ट में बताया गया है कि 3.8 करोड़ की आबादी वाला टोक्यो इकलौता ऐसा शहर है जो दिल्ली (2.5 करोड़) से आगे है। देश का दूसरा सबसे बड़ा शहर मुंबई इस सूची में छठे स्थान पर है 2.1 करोड़ आबादी के साथ।
 

 

जब ऐसा कहा गया है कि मानव (Home Economicus) धन पैदा करने के लिए तैयार किया गया एक यंत्र है, तो भारतीय अर्थशास्त्र में बताए जा रहे उस तर्क की जांच करना अत्यंत आवश्यक हो जाता है, जिसके अनुसार भारत की विशाल जनसंख्या गरीबी का एक कारण है। यदि मनुष्य एक मात्र ऐसी प्रजाति है जो धन पैदा कर सकती है, तो इसकी अधिक संख्या गरीबी का कारण कैसे हो सकती है? सच क्या है ?