आपदा

इस वर्ष मानसून बहुत कमजोर रहा जैसा 1965 में रहा था। लेकिन इस बार इसे थोड़ी बड़ी असुविधा से ज्यादा महत्व नहीं दिया जा रहा जबकि 1965 में यह दैत्याकार और भयावह आपदा थी। भारत पर अब सूखे का असर न पड़ना एक यशोगाथा है लेकिन  ऐसी जिसे आमतौर पर गलत समझा गया है।

Author: 
स्वामीनाथन अय्यर