आदिवासियों

देश के अदिवासियों और पर्यावरण के कई हितैषी और सेंटर फार सिविल सोसायटी जैसी कई संस्थाएं लम्बे समय से बांस को घास घोषित किये जाने के लिए अभियान चलाती रहीं है। बांस समर्थको की मांग रही है कि भारतीय वन कानून (1927) को संशोधित किया जाए और कानून की धारा 2(7) में से बांस को पेड़ों की सूची से हटाया जाए. आखिर क्यों बांस को घास की श्रेणी में रखा जाना चाहिए?