अफ्रीका

खुद को उभरती हुई आर्थिक शक्ति मानकर गर्व करने वाले भारत के लिए यह खबर शर्मनाक है। दुनिया में भुखमरी के शिकार जितने लोग हैं, उनमें से एक चौथाई लोग सिर्फ भारत रहते हैं। भुखमरी के मामले में हमारे हालात पाकिस्तान और बांग्लादेश जैसे मुल्कों से भी कहीं ज्यादा खराब हैं।

बीते 15 जुलाई को आयरिश रॉक स्टार व अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकार कार्यकर्ता बोनो को फ्रेंच गणराज्य के ऑर्डर ऑफ आर्ट्स एंड लेटर्स का कमान्डर बनाया गया। अब शायद वे ही फ्रेंच पार्लियामेंट को “साउंड इकोनॉमिक्स” सिखा सकें। यहां कि पार्लियामेंट लाभ कमाने वाली कम्पनियों को फैक्ट्रियों को बंद करने से रोकने के लिए एक और सोशलिस्ट कानून लाने के बाबत विचार कर रही है।

बोनो? क्या ये वही नहीं हैं जो आर्थिक विकास की समस्याओं के लिए सरकारी समाधान की वकालत के लिए ज्यादा जाने जाते हैं?

पिछले सप्ताह विश्व बैंक ने विश्व में गरीबी की स्थिति पर एक रिपोर्ट जारी की। मनुष्य होने के नाते इस दस्तावेज को पढ़ना आनंददायी रहा, क्योंकि इससे पता लगता है कि कितनी तेजी से हर जगह भीषण गरीबी कम हो रही है। लेकिन, भारत के नागरिक के रूप में रिपोर्ट को पढ़ना निराशाजनक रहा। इसके कारणों पर हम आगे चर्चा करेंगे। पहले अच्छी खबर पर बात करें। 1981 में 1.9 अरब लोग भीषण गरीबी की स्थिति में रह रहे थे, मतलब यह कि प्रतिदिन प्रतिव्यक्ति खर्च बमुश्किल ३क् रुपए था। लेकिन 2010 तक बेहद गरीब लोगों की संख्या घटकर 1.2 अरब रह गई।