अधिकार

समलैंगिकों, किन्नरों और मुख्यधारा से अलग किसी भी सेक्शुअल प्राथमिकता वाले लोगों को लेकर सामाजिक बराबरी का नजरिया संसार के किसी भी देश, किसी भी सभ्यता में नहीं है। लेकिन उन्हें दंडनीय अपराधी मानने की धारणा अगर किसी बड़े लोकतांत्रिक समाज में आज भी जमी हुई है तो वह अपना भारत ही है। देश की सबसे ऊंची अदालत ने साधु-संतों और विभिन्न धार्मिक संगठनों की याचिका पर सुनवाई के बाद दिल्ली हाईकोर्ट के उस फैसले को पलट दिया है, जिसमें ऐसे लोगों को इज्जत से जीने का अधिकार दिया गया था। ध्यान रहे कि दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले में कोई नया हक मांगने वाली याचिका को स

अगर इतिहास हमें कुछ सीखा सकता है तो वह यह कि निजी संपत्ति सभ्यता के साथ अपरिहार्य रूप से जुड़ी हुई है।-लुडविग वान मिजेज

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सरकारी नौकरियों के लिए प्रोन्नति में आरक्षण संबंधी विधेयक को लेकर पिछले दिनों राज्यसभा में जो कुछ हुआ, वह तो शर्मनाक है ही, इस संबंध में सरकार एवं प्रमुख दलों का रवैया उससे भी अधिक शर्मनाक है। समाजवादी पार्टी इसे साफ तौर पर सामाजिक न्याय के विरुद्ध मानती है। बसपा सुप्रीमो मायावती इसके लिए भाजपा से भी मदद की गुहार लगा चुकी हैं और बाद में इसे पारित न करा पाने के लिए भाजपा और कांग्रेस दोनों को समान रूप से जिम्मेदार भी ठहरा चुकी हैं। जाहिर है, वह इस विधेयक के पेश किए जाने को भी अपनी उपलब्धियों में गिनती हैं और आने वाले चुनावों में भुनाने की कोशिश भी करेंगी। भाजपा कई