अत्याचार

देश के तमाम शहरों की सड़कें न सिर्फ लाखों कामगार गरीबों तथा अभावग्रस्त लोगों की आश्रयस्थली वरन उनकी रोजीरोटी का केंद्र भी हैं, जहां पर वे सस्ते और आकर्षक सामानों की दुकान सजाते हैं। शहरों में सड़क किनारे फुटपाथ पर आपकों ऐसे अनेक पुरष-महिलाएं पकाया हुआ भोजन, फल व सब्जियां, कपड़े, खिलौने, किताबें, घरेलू इस्तेमाल की चीजें व सजावटी सामान बेचते मिल जाएंगे। एक अनुमान के मुताबिक भारत में तकरीबन एक करोड़ लोग इस तरह सड़क किनारे सामान बेचते हुए अपनी आजीविका कमाते हैं।

स्कूल से सीधे घर जाएं और अगर कहीं दूसरी जगह जा रहे हैं तो अपने माता-पिता को बताकर जाएं। महिला सुरक्षा के मामले में लगातार फजीहत झेल रही दिल्ली पुलिस के नाम से ऐसी तमाम नसीहतें देने वाले होर्रि्डग व बैनर दिल्ली विश्वविद्यालय के अग्रणी कॉलेजों और अन्य शिक्षा संस्थानों के बाहर पिछले दिनों दिखाई दिए। इन पर दिल्ली पुलिस का ईमेल और फोन नंबर भी लिखे हैं। इन नसीहत भरे पोस्टरों पर लोगों के आपत्ति उठाने के बाद दिल्ली पुलिस ने पूरे मामले से पल्ला झाड़ लिया। पुलिस कह रही है कि वह बता नहीं सकती कि ये बैनर किसने लगाए हैं। गृहमंत्री सुशील कुमार शिंदे ने भी जानकारी होने से इन्कार कर दिया

“नरेला इलाके में घर के बाहर खेल रही 6 साल की बच्ची को बहला फुसलाकर पड़ोसी ने किया बलात्कार। अजमेरी गेट इलाके की 14 वर्षीय छात्रा के साथ अध्यापक द्वारा चार साल से किये जा रहे यौन शोषण मामले का सनसनीखेज खुलासा। सफदरजंग अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्था को धता बताते हुए देररात महिला वार्ड में घुसकर गर्भवती महिला के साथ बलात्कार का प्रयास। मुंडका में नाबालिक युवती के साथ पड़ोसी द्वारा बलात्कार। उत्तर पश्चिम जिले के महेंद्र पार्क में रूई मांगने के बहाने सर्वोदय विद्यालय की नौवीं कक्षा की छात्रा के साथ पड़ोसी युवक द्वारा बलात्कार।“