कमेन्टरी - स्वामीनाथन एस. ए. अय्यर

स्वामीनाथन एस. ए. अय्यर

इस पेज पर स्वामीनाथन एस. ए. अय्यर के लेख दिये गये हैं। ये लेख शीर्ष बिजनेस अखबारों में स्वामीनॉमिक्स कॉलम में प्रकाशित होते हैं।

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हम साम्यवाद के धराशायी होने की बीसवीं सालगिरह की ओर अग्रसर हैं. यह घटना जनता की नुमाइंदगी के साम्यवादी दावे को व्यापक रूप से नकार देती है. फिर भी, ऐसे साम्यवादी दावे अब भी बरकरार हैं जो कभी-कभार युवाओं की नई पीढ़ी को चौंकाते हैं जिन्हें यह मालूम ही नहीं है कि 9 नवंबर 1989 के दिन बर्लिन की दिवार क्यों गिरी.
 
कार्ल मार्क्स का कहना था, लोकतांत्रिक...
Published on 5 Jan 2015 - 20:27
सी. रंगराजन कमेटी द्वारा गरीबी रेखा के संबंध में प्रस्तुत रिपोर्ट को लेकर विवाद मचना तय था। 30 रुपए, 32 रुपए, 35 रुपए और 47 रुपए को गरीबी का पैमाना मानना कहीं से भी तर्कसंगत प्रतीत नहीं होता है लेकिन गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन करने वाले लोगों को मिलने वाली सरकारी सहायता और सब्सिडी का बाजार मूल्य निकालें तो अवश्य ही आंकड़ा 47 रुपए से कई गुना अधिक बढ़ जाएगा। यह भी सोचने वाली बात है कि आखिर "वेलफेयर" (भोजन का अधिकार, शिक्षा का अधिकार, रोजगार का अधिकार, मुफ्त चिकित्सा सुविधा) के नाम पर इतना...
Published on 8 Jul 2014 - 18:26
नरेंद्र मोदी के फैंस चाहते हैं कि वह गुजरात का विकास मॉडल पूरे देश में लागू करें। उन्हें लगता है कि सख्त दिखने का जोखिम उठा सकने वाले मोदी ऐसे फैसले लेने में कोई कोताही नहीं बरतेंगे, जो फौरी तौर पर भले तकलीफदेह लगें, लेकिन आगे चलकर अच्छे नतीजे देंगे। उन्हें भरोसा है कि चुनाव प्रचार के दौरान किए गए वादों के मुताबिक वह हिंदुस्तानियों को खैरात पर पलने वाली जमात नहीं बल्कि तेज आर्थिक विकास से उपजे अवसरों का आकांक्षी समुदाय मानकर चलेंगे। लेकिन अफसोस कि पिछले हफ्ते लिए गए मोदी के तमाम फैसले...
Published on 2 Jul 2014 - 19:28

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