आजीविका सुरक्षा बिल में नामौजूद मुद्दे

शहरी विकास मंत्रालय, राजस्थान सरकार द्वारा ‘राजस्थान शहरी फुटपाथ व्यवसायी (आजीविका कि सुरक्षा और फुटपाथ व्यवसाय नियमन) बिल 2010’ बनाया गया है पर खेद का विषय है कि इस बिल में कई ऐसे महत्वपूर्ण प्रावधान नहीं है जो भारत सरकार द्वारा बनाए गये राष्ट्रीय फुटपाथ नीति 2004 व 2009 के महत्वपूर्ण अंग है. कई ऐसे अहम मुद्दे जो फुटपाथ व्यवसायियों का संरक्षण करने हेतु अति आवश्यक है परन्तु वे राज्य विधेयक में नहीं है. उल्लेख्ननीय है कि उच्चतम न्यायालय ने 30 जून 2011 तक फुटपाथ व्यवसायियों के आजीविका के संरक्षण हेतू विधेयक बनाने का निर्णय दिया गया है.

राज्य विधेयक में सम्मिलित किये जाने लायक कुछ ज़रूरी मुद्दे छोड़ दिए गए हैं.असंगठित छेत्र में उद्यमिता के अध्ययन हेतु भारत सरकार द्वारा बनाए गये कमीशन के रिपोर्ट में तथा राष्ट्रीय नीति 2009 में फुटपाथ व्यवसायियों को शहरी आबादी का 2% माना गया है| माननीय उच्चतम न्यायालय ने भी अपने फैसलों में स्थान आवंटन के लिये इसे ही आधार माना है| इसलिये शहरी स्थान नियोजन में फुटपाथ व्यवसायियों के लिए 2% स्थान का प्रावधान अत्यंत आवश्यक है

राष्ट्रीय नीति 2009 में प्रावधान है कि फुटपाथ व्यवसायियों के लिए योजना निर्माण व क्रियान्वयन में प्राकृतिक बाजारों को सम्मिलित किया जाए जो कि राज्य विधेयक में नहीं है | हम फुटपाथ व्यवसायियों को मन्दिर के पास पूजा की सामग्री, रिहायशी कालोनियों में फल-सब्जी व रोजमर्रा के जरूरतों के सामान तथा कार्यालयों के पास खाने पीने की सामग्री बेचते हुए पाते है जिसकी वहाँ जरुरत है| इन को ऐसे स्थानों से हटाना व बसाना माँग व पूर्ति के नियम के खिलाफ होगा, आर्थिक तारतम्यता को बाधित करेगा तथा शहर में अराजकता के माहौल का निर्माण करेगा |

फुटपाथ व्यवसायियों के आजीविका की सुरक्षा हेतु यह बहुत आवश्यक है की वर्तमान के फुटपाथ व्यवसायियों का व्यवस्थित किया जाये साथ ही नए व्यवसायियों हेतु भी प्रावधान किया जाये अन्यथा ऐसे विधेयक कभी अपने सही उद्देश्यों को प्राप्त नहीं कर सकेंगे| राष्ट्रीय नीति 2009 में ऐसे प्रावधान है जबकि राज्य विधेयक में ऐसे कोई प्रावधान नहीं है |

नगर निगमों द्वारा फुटपाथ व्यवसायियों के सामान तथा उपकरण को जब्त किया जाना आम बात है | सामान वापस पाने के लिए समयबद्ध व सुनिश्चित प्रक्रिया न होने के कारण फुटपाथ व्यवसायी को रोजी-रोटी हेतु भटकना पड़ता है | राष्ट्रीय नीति 2009 सामान जब्त करने की स्थिति को अंतिम उपाय का प्रावधान करता है जबकि राज्य विधेयक ऐसा कोई प्रावधान नहीं करता है | यह विडम्बना ही है की अमीरों द्वारा नियमों के उलंघन पर केवल जुर्माना का प्रावधान होता है परन्तु गरीबों से उनके आजीविका का साधन ही छीन लिया जाता है |

दूसरी तरफ राज्य विधेयक का अनुछेद 9 वेंडिंग ज़ोन का निर्हरण तथा स्थान के चिन्हीकरण करने को कहता है | ऐसा देखा गया है की नगर निगम लगभग पूरे शहर को ही नॉन वेंडिंग ज़ोन मान लेती है जो की राष्ट्रीय नीति 2009 के विरुद्ध है | शहर के केवल कुछ ही अतिसवेदंशील छेत्र को नॉन वेडिंग ज़ोन के परिधि में लाना चाहिए तथा अन्य सभी छेत्र वेंडिंग ज़ोन माना जाना चाहिए | आवश्यकता पड़ने पर वेंडिंग ज़ोन में भी कुछ प्रतिबन्ध लगाकर प्रतिबंधित वेंडिंग ज़ोन बनाया जा सकता है | चूँकि फूटपाथ व्यवसायी आम नागरिकों के सुविधा में वृद्धि करते है अतः किसी भी छेत्र को नॉन वेंडिंग ज़ोन घोषित करना अंतिम उपाय के रूप में प्रयोग करना चाहिए न की प्रथम उपाय |

राज्य विधेयक ये भी कहता है कि टाउन वेंडिंग कमेटी वार्षिक वित्तिय लेखा-जोखा का निर्माण व मुद्रण करेगा | विधेयक के प्रावधानों का सही पालन तथा सर्वश्रेष्ठ तरीकों का आदान प्रदान करने के लिए यह आवश्यक है की टाउन वेंडिंग कमेटी वार्षिक वित्तीय लेखा-जोखा के साथ ही विवरणात्मक प्रगति प्रतिवेदन का भी निर्माण व मुद्रण करे |
-- स्निग्धा द्विवेदी