मधुमक्खी का छत्ताः एक अत्यंत प्रासंगिक कहानी

एक बार की बात है। एक चमकदार और रंगीन फूलों से भरे घास के मैदान और उद्यानों के बीचोबीच स्थित एक पुराने पेड़ पर मधुमक्खियों का एक बड़ा छत्ता स्थित था। छत्ते में एक रानी मधुमक्खी थी, जिसे कुछ वरिष्ठ मधुमक्खियों के साथ छत्ते के संचालन के लिए चुना गया था। सामूहिक रूप से चयनित इस व्यवस्था को सरकार कहा जाता था। श्रमिक मधुमक्खियों को विश्वास था कि सरकार उनके द्वारा एकत्रित शहद का समुचित भंडारण करेगी और उनकी देखभाल करेगी। सरकार के उपर भी एक जिम्मेदारी थी कि वह नए नए उद्यानों की खोज करेगी ताकि मधुमक्खियों के बच्चों की आने वाली पीढ़ी के लिए फूलों और रस का नया स्त्रोत पैदा किया जा सके।

स्थिरता सुनिश्चित करने और अव्यवस्था से बचने के लिए सरकारी मधुमक्खियों ने नियम बनाएं और कानून पारित किये। श्रमिक मधुमक्खियों के लिए उनका पालन करना आवश्यक था, ऐसा नही करने पर उनके लिए दंड की व्यवस्था की गई थी। काफी हद तक यह आवश्यक भी था क्योंकि छत्ते में विभिन्न प्रकार की मधुमक्खियां रहती थीं और अक्सर आपस में ही लड़ बैठती थीं। उदाहरण के लिए मधुमक्खियों की मुख्यतः दो प्रजातियां थीं, काली मधुमक्खियां और भूरी मधुमक्खियां। आमतौर पर दोनों प्रजातियों की मधुमक्खियां एक ही काम करती थीं, लेकिन उन दोनों की भेषभूषा और पूजा पाठ करने के तौर तरीकों में थोड़ी भिन्नता थी।

अच्छे समय में, यह एक उत्तम छत्ता था। हालांकि समय बीतने के साथ साथ परिस्थितियां भी बदलने लगीं। सरकारी मधुमक्खियों के बच्चे, रिश्तेदार, मित्र होते गए। लेकिन उनमें से सभी सरकार में शामिल नहीं हो सकते थे। अतः अन्य मधुमक्खियों के जैसे ही उन्हें भी श्रमिक बनना था। एक दिन एक वरिष्ठ सरकारी मधुमक्खी के पुत्र ने अपने पिता से कहा कि श्रमिकों का कार्य अत्यधिक मेहनत का कार्य है। आप मुझे शहद के भंडार से कुछ शहद क्यों नहीं दे देते? इस पर पिता मधुमक्खी ने कहा, लेकिन यह तो गलत होगा।

इसपर, सरकारी मधुमक्खी के पुत्र ने कहा, किसी को पता नहीं चलेगा। सरकार में क्या होता है यह सिर्फ सरकार ही जानती है। वह सही कह रहा था। श्रमिक मधुमक्खियां सरकार पर अपने से ज्यादा भरोसा करती थीं। शहद की थोड़ी सी मात्रा कम होने पर किसी को पता भी नहीं चला।

इसके बाद तो ऐसा सिलसिला ही चल पड़ा। धीरे-धीरे सभी सरकारी मधुमक्खियों के बच्चे, चचेरे भाई, रिश्तेदार, मित्र और शुभेच्छुओं ने भंडार में से थोड़ा थोड़ा कर शहद चुराना शुरू कर दिया। इससे उन्हें दिनभर बागीसे में मजदूरी करने की जरूरत नहीं पड़ती थी। कुछ समय बाद श्रमिक मधुमक्खियों ने गौर किया कि शहद की मात्रा उम्मीद के अनुरूप नहीं बढ़ रही थी। जब कुछ श्रमिक मधुमक्खियों ने इस ओर ध्यानाकार्षण कराने का प्रयास किया तो सरकार ने मधुमक्खियों से आलस का त्याग और ज्यादा श्रम करने का आदेश जारी कर दिया।

श्रमिक मधुमक्खियां, अधिक शहद पाने के लिए और अधिक मेहनत करने लगीं। लेकिन शहद का स्तर था कि बढ़ने का नाम ही नहीं ले रहा था। और तो और, बजाए बढ़ने के यह तो घटने लगा था। शीघ्र ही, सरकारी मधुमक्खियों ने एक और नया तरीका ढूंढ निकाला। जब भी किसी नए उद्यान की खोज होती, सरकारी मधुमक्खियां उन्हें अपने बच्चों, मित्रों व रिश्तेदारों को पहले देने लगीं। सरकारी हलकों में यह बात चलने लगी कि "जो बात श्रमिक मधुमक्खियों को पता ही नहीं थी वो भला उसका क्या शोक करेंगी"। समय के बीतने के साथ साथ, न केवल शहद का स्तर घटता चला गया बल्कि श्रमिकों के बच्चों के लिए नए नए उद्यानों की खोज भी कम होती गई। वे बेकार बैठे रहने लगे और भूखे रहने की नौबत आ गई। रानी मधुमक्खियों द्वारा कभी कभी श्रमिक मधुमक्खियों की ओर सहायता के कुछ टुकड़े फेंक दिए जाते थे जिसकी कि सभी के द्वारा काफी प्रशंसा होती थी। यह बात और है कि वे टुकड़े भी अपर्याप्त होते थे।

एक दिन एक प्रभावशाली मधुमक्खी ने आखिरकार पूछ ही लिया कि "शहद कौन चुरा रहा है?" यह देख कि प्रभावशाली प्रदर्शनकारी मधुमक्खी काली प्रजाति की है, सरकार ने कहा कि भूरी मधुमक्खियां ऐसा कर रहीं हैं। इसके बाद सरकार ने भूरी मधुमक्खियों को बुलाया और उनसे कहा कि ऐसा प्रतीत होता है आप सभी के श्रम का फल काली मधुमक्खियां चुरा रहीं हैं।  

भूखी और थक चुकी काली और भूरी मधुमक्खियां गुस्से से भर उठीं। वे आपस में लड़ने लगीं। सरकारी मधुमक्खियों ने अन्य मधुमक्खियों को मुद्दे से भटकता देख, खुशियां मनाई और शहद की चोरी जारी रखी। जैसे ही भूरी और काली मधुमक्खियां मरतीं और परेशान होतीं, सरकार सहायता के कुछ टुकड़ें फेंक देती। श्रमिक मधुमक्खियां रानी मधुमक्खी की फिर से प्रशंसा करने लगतीं।

इन सबके बीच सूखा भी पड़ गया। बागों में बहुत थोड़े से ही फूल बचे रह गए और कई वर्षों से भंडार में एकत्रित किए गए शहद के प्रयोग का समय आ गया। लेकिन ये क्या, आश्चर्यजनक रूप से भंडार में थोड़ा भी शहद नहीं बचा था। आमतौर पर सरकार पर विश्वास करने वाली मधुमक्खियां सरकारी मधुमक्खियों और उनके रिश्तेदारों के घर का निरीक्षण किया तो सभी को मोटा तगड़ा और अपने खुद का भंडार जमाए पाया। और तो और उन्हें वहां से सैकड़ों ऐसे बागों का नक्शा भी मिला जिनकी खोज तो हुई थी लेकिन इसकी सूचना उनके साथ कभी साझा नहीं की गई थी।  

निराश और हैरान श्रमिक मधुमक्खियां अपने जर्जर घरों की ओर वापस लौट आयीं। काली और भूरी मधुमक्खियों ने एक दूसरे की आंखों में देखा। उन्हें इस बात का भान हो गया कि उन्हें मूर्ख बनाया गया था। वे एक दूसरे से गले मिलीं और परस्पर की गई क्षति के लिए क्षमा याचना की।

"हम उन्हें पाठ अवश्य पढ़ाएंगीं, काली और भूरी मधुमक्खियों ने एकमेव स्वर में कहा। श्रमिक मधुमक्खियों को यह बात समझ में आ गई कि अब अपने डंक का इस्तेमाल एक दूसरे के खिलाफ करने की बजाए उनके खिलाफ करने का समय आ गया है जिन्होंने उन्हें मूर्ख बनाया है। उधर, रानी मधुमक्खी को माहौल की गंभीरता समझ में आ गई। उसने अपने सुंदर और जवान बेटे को प्रस्तुत करते हुए कहा कि अब से मेरा पुत्र आपकी सेवा करेगा, जैसे कि वर्षों से मैं करती आयी हूं।"

लेकिन काली और भूरी मधुमक्खियां पहले से ज्यादा समझदार हो चुकी थीं। वे झुंड में एकत्रित हुई और अपने अपने डंक को सरकार और उनके हिमायती लोगों के विरोध में फैला लिया। सरकारी मधुमक्खियों को छत्ता छोड़कर भागना पड़ा और उन्हें अपने सामानों को एकत्रित करने का मौका भी नहीं मिला। जल्द ही सभी वहां से रफूचक्कर हो गयीं।

काली और भूरी मधुमक्खियों ने परिवर्तन के लिए अपने बीच के सर्वश्रेष्ठ लोगों का चयन करने का फैसला किया। साथ ही उन्होंने कभी भी किसी पर आंख मूंदकर विश्वास न करने और सभी चीजों की निगरानी करने का भी फैसला किया। छत्ता फिर से खुशहाल हो गया। नयी युवा पीढ़ी ने शहद एकत्रित करने के लिए कठिन परिश्रम किया। नई पीढ़ी ने समृद्धि स्थापित किया और उनका छत्ता दुनिया का सर्वश्रेष्ठ छत्ता बन गया।

कुछ वर्षों के बाद, एक वृद्ध मधुमक्खी ने अपने नाती पोतों को रात में बात करत हुए कहा, "क्या तुम्हें पता है कि हमारे समय में एक रानी मधुमक्खी हुआ करती थी?" "हां", बालक मधुमक्खी ने कहा "लेकिन अब नहीं है। क्योंकि अब हम सबके भीतर एक राजा है।"

 

- चेतन भगत (लेखक अंग्रेजी के जाने माने उपन्यासकार हैं)