सांसदों की रिश्वतखोरी पर लगाम

नोट के बदले वोट मामले मे तिहाड़ जेल मे सज़ा काट रहे राज्य सभा सदस्य अमर सिंह को स्वास्थ्य और सुरक्षा कारणों से हाल मे अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान ले जाया गया जहां डॉक्टरों ने उन के लिये मनोचिकित्सक परामर्श की आवश्यकता बतलायी है. समाजवादी पार्टी से अलगाव के बाद, राजनैतिक दांवपेंचों के महारथी माने जाने वाले अमर सिंह के लिए ये गिरफ्तारी एक और बड़ा झटका था. हालांकि  राजनैतिक खरीद फरोख्त में लिप्त पार्टियों के लिए ये एक कड़ा संकेत है.

अमर सिंह और भारतीय जनता पार्टी(भाजपा) के दो पूर्व सांसदों फग्गन सिंह कुलस्ते और महावीर सिंह भगोरा को छह सितंबर को गिरफ्तार कर लिया गया था. वर्ष 2008 में वामपंथियों के समर्थन वापस लेने के बाद संकट में आयी संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन(यूपीए) सरकार को बचाने की पहल मे विश्वास प्रस्ताव के दौरान सांसदों को रिश्वत देने की कथित कोशिश मे अमर सिंह का नाम सामने आया था. अमर सिंह के पूर्व सहयोगी संजीव सक्सेना को कुछ सांसदों के यहां रुपये पहुंचाने का आरोप है. सांसदों ने आरोप लगाया था कि उन्हें तत्कालीन मनमोहन सिंह सरकार द्वारा आयोजित विश्वास मत के दौरान गैरहाजिर रहने के लिए पैसे दिए गए थे.

नोट के बदले वोट कांड ने हमारे देश की संसदीय गरिमा को मैला किया था और राजनितिक अवसरवादिता और अनैतिकता का एक गन्दा उदहारण दिया था. इस कांड से ये उजागर हुआ था कि किस तरह नेता अपने फायदे के लिए संवैधानिक मर्यादाओं को ताक पर रख सौदेबाजी में लिप्त हो सकते हैं. लोकतंत्र में लोक के मत और आकांक्षाओं का विचार ना कर के, निजी हितो के लिए जनता के तथाकथित प्रतिनिधि सालों से तरह तरह के खेल रचते आ रहें हैं. पर आज कल भ्रष्टाचार के खिलाफ पूरे देश में पैदा हुए माहौल में ये गिरफ्तारियां भी एक अच्छा कदम है. राजनीति से जुड़े किसी बड़े मुद्दे पर यह पहली बार हुआ है कि भंडाफोड़ करने वाले सांसदों को भी पुलिस न केवल आरोपी बनाया बल्कि हिरासत में लेकर जेल मे भी डाल दिया है. कुलस्ते और भगोरा को आरोपी इसलिए बनाया गया क्योंकि ये बिकने को तैयार हो गए. देश में राजनीति की सफाई की दिशा में ये एक अच्छी शुरुआत है और इस से धूर्त तत्वों को सबक मिलेगा.

- स्निग्धा द्विवेदी