बेशर्मी मोर्चे ने नारी का सम्मान याद कराया

राजधानी दिल्ली में भी रविवार को यौन हिंसा के खिलाफ चल रहे वैश्विक प्रतिरोध कार्यक्रम के तहत ‘स्लट वॉक’ यानी बेशर्मी मोर्चे का आयोजन किया गया. विभिन्न आयु वर्ग से जुड़े लोगों ने जंतर-मंतर पर इस प्रदर्शन में भाग लिया और महिलाओं के साथ होने वाले बलात्कार या यौन उत्पीड़न को उनके कपड़े पहनने के सलीके से जोड़े जाने का विरोध किया. सैक़ड़ों की संख्या में महिलाएं हाथों में "सोच बदल, कप़ड़े नहीं", "मेरी छोटी स्कर्ट का तुमसे कोई लेना-देना नहीं है" जैसे नारे लिखी तख्तियां लेकर रोष जता रही थीं। तख्तियों पर लिखे स्लोगन के साथ नारे लगाते हुए जंतर मंतर पहुंचे कार्यकर्ताओं ने ढोल, ड्रम व ढपली की थाप पर महिलाओं के प्रति सम्मान प्रदर्शित किया। इस "स्लटवॉक" में इंग्लैंड, जर्मनी, बांग्लादेश समेत कई देशों की महिलाएं भी शामिल हुईं।

सभी प्रदर्शनकारियो ने नारी का सम्मान करो, सोच बदलो, कपड़े नहीं का नारा बुलंद किया। उन का कहना था कि लोगों की मानसिकता खराब है जिससे महिलाओं का यौन उत्पीड़न और छेड़छाड़ का शिकार होना पड़ता है। बेशर्म लड़कियां नहीं हैं, बल्कि बेशर्म सोच है  और बेशर्म लोग ही यौन उत्पीड़न के पीछे शॉट स्कर्ट और कम कपड़े पहनने को वजह बताते हैं। इस दौर में सोच बदलने की आवश्यकता है। जब तक सोच नहीं बदलेगी, नारी को सम्मान नहीं मिलेगा।

इस वर्ष स्लट वॉक आंदोलन की शुरुआत कनाडा के टोरंटो में एक पुलिस अधिकारी के बयान के बाद हुई थी जिसमें उसने कहा था कि महिलाओं को यौन प्रताडना से बचने के लिए वेश्याओं की तरह के कपडे पहनने बंद करने चाहिए। जल्द ही यह आंदोलन उत्तर अमेरिका, यूरोप, दक्षिण अफ्रीका एवं ऑस्ट्रेलिया समेत विश्व के तमाम हिस्सों में फैल गया।

महिलाओं को उनकी पसंद के मुताबिक हर कपड़े पहनने का अधिकार है और कोई भी सिर्फ इसी बात को आधार बनाकर महिलाओं के खिलाफ यौन प्रताड़ना को जायज नहीं ठहरा सकता है। लैंगिक समानता, पुरातनपंथी सोच तथा पीड़ित को आरोपित करने की मानसिकता को इस मोर्चे मे उचित ढंग से उठाया गया.

भारतीय संस्कृति पितृसत्तात्मक है और लोगों के लिए यह स्वीकारना अभी भी बहुत मुश्किल है कि लडकियां काम करने निकलती हैं, यात्रा करती हैं, और रात में भी बाहर जाती हैं. वास्तव मे स्लट वॉक एक जागृति है। समाज में जब तक नारी का सम्मान नहीं होगा समाज का उत्थान मुश्किल है. दिल्ली में यौन उत्पीड़न की घटना बराबर सुनने को मिलती है इसलिये यहाँ स्लट वॉक का आयोजन महत्त्वपूर्ण था. मोर्चा पुरुषों के उस संकीर्ण मानसिकता के खिलाफ निकाला गया जो महिलाओं को उनके ही खिलाफ हो रहे अपराध के लिए जिम्मेदार ठहराता है। समय समय पर ऐसे आन्दोलन व प्रदर्शन भारतीय नारी की अस्मिता और गौरव की याद दिलाने के लिए आवश्यक हैं.

- स्निग्धा द्विवेदी