सऊदी अरब में महिलाओं को मिला मताधिकार

सऊदी अरब में पहली बार महिलाओं को वोट डालने का अधिकार दिया गया है. महिला अधिकारों की दिशा मे सार्थक कदम उठाते हुये, किंग अब्दुल्लाह ने एलान किया कि महिलाएं वोट डाल पाएंगी और स्थानीय चुनावों में हिस्सा भी ले पाएंगी. पश्चिम एशिया में लोकतांत्रिक और सामाजिक सुधारों के लिए चल रहे आंदोलनों के बीच सऊदी अरब के शाह अब्दुल्ला बिन अब्दुल अजीज अल साद ने महिलओं को मतदान और चुनाव लड़ने का अधिकार देने की यह घोषणा की.

अपने भाषण में किंग अब्दुल्लाह ने कहा, "हमने फैसला किया है कि अगले सत्र से महिलाएं शूरा काउंसिल में भी हिस्सा ले सकेंगी. रायशुमारी या सलाह देने के काम में मुस्लिम महिलाओं को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए." शूरा निर्वाचित संस्था नहीं है और इसके द्वारा बनाए कानून बाध्यकारी नहीं हैं. सऊदी अरब में अगले सप्ताह होने वाले निगम चुनावों में केवल पुरुषों को ही मतदान का अधिकार होगा लेकिन महिलाओं को 2015 में होने वाले चुनावों में मतदान का अधिकार हासिल होगा.

सऊदी अरब के इतिहास में दूसरी बार स्थानीय निकाय चुनाव हो रहे हैं. कुल 816 सीटों के लिए चुनाव में 5,324 प्रत्याशी भाग लेंगे और देश की 285 परिषदों की आधी सीटें भरेंगे. शेष आधी सीटों पर सरकार नियुक्तियां करेगी. चुनाव में करीब 10.2 लाख मतदाता अपने मताधिकार का इस्तेमाल करेंगे. अगला चुनाव चार साल बाद होगा और तब तक महिलाओं को इंतजार करना होगा पर फिर भी इसे एक बहुत अच्छी खबर की तरह लिया जा रहा है.

सऊदी अरब कट्टर इस्लामिक देश है जहां महिलाओं को बहुत कम अधिकार हासिल हैं. यहाँ महिलाओं के गाड़ी चलाने और पुरूष संरक्षक की सहमति के बिना कहीं जाने पर रोक है. महिलाएं लंबे समय से यहाँ मताधिकार के लिए आवाज उठा रही थीं. महिला को उनके अधिकार देने की दिशा में एक अहम कदम है. उम्मीद है कि अब महिलाओं को उनकी जिंदगी से जुड़े मुद्दों पर होने वाले फैसलों में भागीदारी का मौका मिलेगा और समाज मे एक हितकारी बदलाव आयेगा. ट्यूनीशिया और मिस्त्र की क्रांति के बाद, अरब देशों में एक विद्रोही माहौल बन गया है. सउदी अरब सरकार ऐसे कदम उठा कर अपनी बदलती हुई प्रगतिशील मानसिकता का परिचय देने का प्रयास कर रहा है. सामाजिक बदलाव के लिए महिलाओं की भागीदारी बहुत आवश्यक है और इस्लामिक देशों में ऐसा होना और भी ज्यादा ज़रूरी है.

- स्निग्धा द्विवेदी