संजीव सबलोक को भी भायी पूंजीवाद की नैतिकता

भारतीय प्रशासनिक सेवा को छोड़कर सिविल सोसायटी और फिर स्वर्ण भारत पार्टी नामक उदारवादी राजनैतिक दल का गठन करने वाले संजीव सबलोक ने हाल ही में प्रकाशित हुई किताब "पूंजीवाद की नैतिकता" और इसमें शामिल सामग्री की सराहना की है। उन्होंनें विश्वास जताया कि लोगों को यह किताब न केवल पसंद आएगी बल्कि पूंजीवाद के प्रति उनके पूर्वाग्रह को भी समाप्त करने में सफल रहेगी। उन्होंनें ज्यादा से ज्यादा उदारवादी वैश्विक पाठ्य सामग्रियों के हिंदी अनुवाद की जरुरत पर बल दिया। 
 
संजीव सबलोक शुक्रवार को सेंटर फॉर सिविल सोसायटी के हौजखास स्थित कार्यालय में "उदारवादी राजनैतिक आंदोलन का गठन" विषय पर आयोजित व्याख्यान "चिंतन" के दौरान लोगों को संबोधित कर रहे थे।
 
विदित हो कि मुक्त व्यापार, बाजार, हिमायती पूंजीवाद (क्रोनी कैपिटलिज्म) और पूंजीवाद की अवधारणा पर विस्तृत प्रकाश डालती यह किताब अंग्रेजी किताब “द मोरालिटी ऑफ कैपिटलिज्म” का हिंदी अनुवाद है। इस किताब का संपादन एटलस इकोनॉमिक रिसर्च फाऊंडेशन के वाइस प्रेसिडेंट डा. टॉम जी. पॉमर व हिंदी अनुवाद आजादी.मी के संपादक अविनाश चंद्र ने किया है। 
 
उपरोक्त पुस्तक में गुरचरन दास, स्वामीनाथन अंकलेसरिया अय्यर, जगदीश भगवती व पार्थ जे. शाह जैसे जाने माने अर्थशास्त्रियों और लेखकों के निबंध शामिल हैं। यह पुस्तक हिंदी से पहले चीनी, अरबी, परसियन, रूसी, स्पैनिश, अजरबैजानी, अर्मेनी, फिन्निश (फिनलैंड) और फ्रेंच भाषा में प्रकाशित हो चुकी है।