कानून वो क्या होता है?

भारत के बारे में विदेशियों के बीच एक बात पर अवश्य राय कायम होते देखा जा सकता है। और यह राय यहां कानूनों की अधिकता और उसके न्यूनतम अनुपालन को लेकर है। यह नकारात्मक राय इन दिनों एक और कानून की अनदेखी के कारण और प्रबल हो रहा है। इस बार ऐसा आरटीई यानी शिक्षा का अधिकार कानून के अनुपालन में हो रही लापरवाही और हीला हवाली के कारण हो रहा है। दरअसल,निशुल्क एवं अनिवार्य शिक्षा प्रदान करने के लिए वर्ष 2009 में निर्मित शिक्षा का अधिकार कानून (आरटीई) को हर हाल में कड़ाई से लागू किए जाने को लेकर हाल ही में सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने के बाद ऐसा लगा कि देश में शिक्षा क्रांति का प्रादुर्भाव बस होने को ही है। अब देश में कोई बच्चा अशिक्षित नहीं रहेगा। सबको गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्राप्त होगी और उनका भविष्य रौशन होगा। लेकिन...फिर वही ढाक के तीन पात वाली कहावत चरितार्थ होती दिखाई दे रही है। आज भी यदि बच्चे को दाखिला मिल जाए तो शुक्र ही मनाईए। मजे की बात यह है कि सबको शिक्षा उपलब्ध कराने के सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने के बाद इस कानून की सबसे ज्यादा अनदेखी सरकारी अथवा सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों में ही ज्यादा हो रही है। दाखिले के इच्छुक गरीब छात्रों को कहीं सीट न होने का बहाना सुनने को मिलता है तो कहीं दाखिले के लिए बच्चे से पुलिस वेरिफिकेशन कराकर लाने को कहा जाता है तो कहीं छात्र-छात्राओं की किसी बीमारी को आड़ बनाकर स्कूल से निकाला जाता है। क्या होगा इस शिक्षा के अधिकार वाले कानून का? कैसे होगा इस कानून का अनुपालन? छात्रों की इस भारी समस्या को इंगित करता यह कार्टून हल्के फुल्के ढंग से व्यवस्था पर कड़ा प्रहार करता है। कार्टून को ध्यान से देखें, पढ़े और अपने विचार प्रकट करें। शायद आपके विचार के माध्यम से कोई समाधान निकल सके।

- अविनाश चंद्र