रॉकस्टार बोनो का हृदय परिवर्तन

बीते 15 जुलाई को आयरिश रॉक स्टार व अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकार कार्यकर्ता बोनो को फ्रेंच गणराज्य के ऑर्डर ऑफ आर्ट्स एंड लेटर्स का कमान्डर बनाया गया। अब शायद वे ही फ्रेंच पार्लियामेंट को “साउंड इकोनॉमिक्स” सिखा सकें। यहां कि पार्लियामेंट लाभ कमाने वाली कम्पनियों को फैक्ट्रियों को बंद करने से रोकने के लिए एक और सोशलिस्ट कानून लाने के बाबत विचार कर रही है।

बोनो? क्या ये वही नहीं हैं जो आर्थिक विकास की समस्याओं के लिए सरकारी समाधान की वकालत के लिए ज्यादा जाने जाते हैं?

हां, ये वही हैं।

लेकिन पिछले साल के अंत में, जॉर्ज टाउन विश्वविद्यालय के ग्लोबल सोशल एंटरप्राइज पहल कार्यक्रम में एक बदला हुआ बोनो देखने को मिला। बोनो ने दावा किया कि गरीब देशों में आर्थिक विकास को प्रोत्साहित करने का तरीका “वाणिज्य और पूंजीवादी उद्यमशीलता” है। यह एक सुखद परिवर्तन था!

यदि वाणिज्य और उद्यमशीलता गरीब अफ्रीकी लोगों के लिए अच्छा है तो यह फ्रांस और अन्य देशों के लोगों के लिए भी अच्छा होगा। सरकार वांछित उद्ममशीलता की बजाए भीड़ गिनती है और इस प्रकार विकास और आजादी दोनों बाधित करती है। फैक्ट्रियों को बंद होने से रोकना भद्र प्रतीत होता है लेकिन ग्राहकों की सेवा के लिए व्यापार को लचीलेपन की जरूरत होती है। फैक्ट्रियों को बंद से होने से रोकना अप्रत्यक्ष तौर पर उनके खुलने की प्रक्रिया को रोकता है। इससे किसका फायदा होता है?

बोनों की अंतर्दृष्टि उन्हें अनोखा बनाती है। एक रॉक स्टार के लिए मुक्त बाजार का समर्थन करना दुर्लभ है। वे आदर्शवादी और अभौतिकवादी ही दिखना ज्यादा पसंद करते हैं। वैसे भी ये संगीतकार उद्यमशील पूंजीवाद से अछूते कैसे रह सकते हैं। यह अपेक्षाकृत मुक्त बाजार की ही देन है जिससे कि पश्चिमी देशों के प्रतिव्यक्ति आय में वृद्धि हुई और अधिक लोगों को कला को आत्मसात करने का मौका मिला।  

इसके अतिरिक्त आधुनिक संगीत के यंत्र जैसे इलेक्ट्रॉनिक गिटार से लेकर माइक्रोफोन, एम्पलिफायर से लाइट्स तक सभी हजारों कठिन परिश्रम करने वाले उद्ममियों की ही देन है जो प्रतिस्पर्धी बाजार में जोखिम उठाते हैं। इलेक्ट्रॉनिक गिटार के अविष्कारक लियो फेंडर को ही देख लें। उनका मशहूर स्ट्रेटोकास्टर गिटार जो लिजेंड्री यू2 के मध्य में रखा होता है या अन्य बैंडों और कलाकारों जैसे जिमी हेन्ड्रिक्स, डायर स्ट्रेट्स, एरिक क्लैपटन व पिंक फ्लॉयड की शोभा बढ़ाता है। यदि सरकारी केंद्रीयकृत आर्थिक योजना होती तो यह सब कहां से आता। क्या ब्यूरोक्रैट्स फेंडर को गिटार के अविष्कार की अनुमति देते?

उद्यमशील पूंजीवाद और इसके वैश्विक व्यापार की संभावना के बिना रॉकस्टार्स लखपति और करोड़पति नहीं बन सकते थे। भूख और गरीबी के खिलाफ लड़ाई में वे कैसे आर्थिक सहायता और चैरिटी करते? उनका भाग्य सहकारी बाजार की सक्रियता और उत्पादक और खरीददारों के आपसी हित और आदान प्रदान पर निर्भर करता है।  

अंत में सबसे महत्वपूर्ण, पूंजीवाद की उद्यमशीलता की स्वतंत्रता- प्रेरणा, नवाचार, सृजनशीलता और सहयोग की प्रक्रिया- कला की जान है। इसलिए पारंपरिक मुक्त बाजार विरोधी लगातार लड़खड़ा रहे हैं जैसा बोनों को अब अनुभव हुआ है।
पश्चिमी रॉकस्टार्स के लिए बाजार ठीक हो सकता है लेकिन अफ्रीका के गरीब क्या सरकारी सहायता के बगैर जिंदा रह सकते हैं? बोनो इसका सटीक जवाब देते हैं। “यहां और दुनियां भर के देशों में गरीबी से जूझते हुए कल्याणकारी राज्य और विदेशी सहायता मरहम पट्टी हो सकती है लेकिन इलाज मुक्त उद्मम ही है।”

पूर्व के अपने कार्यो और अपनी ख्याति के कारण, बोनो, दुनिया को समझाने की अनूठी स्थिति में है कि अंतर्राष्ट्रीय सहायता सहायता करने की बजाए गरीबों का नुकसान पहुंचाने वाले होते हैं क्योंकि ये राजनीतिक प्रोत्साहन को विकृत बनाता है और उद्ममशीलता को नुकसान पहुंचाता है।

इसके अतिरिक्त, बोनो दुनिया को यह भी समझा सकता हैं कि मुक्त उद्यम सबके हित में है ना कि सिर्फ अविकसित देशों के लिए।

 

- डा. इम्मेनुअल मार्टिन

(लेखक एटलस नेटवर्क के LibreAfrique.org से जुड़े हैं)