आम नहीं, खास हुनर है रिक्शा-टैक्सी चलाना

रिक्शा-टैक्सी चालकों को शहर की यातायात व्यवस्था के लिए परेशानी का सबब मान नए-नए नियम बना उन्हें नियंत्रित करने और इस क्रम में परिवहन व्यवस्था व चालकों की रोजी रोटी दोनों के साथ खिलवाड़ करने वाले टाऊन प्लानर्स व नीति-निर्धारकों को नासिक के यशवंतराव चाह्वाण ओपन यूनिवर्सिटी से सबक लेनी चाहिए। यूनिवर्सिटी के मुताबिक यह काम आम नहीं बेहद खास है और इसके लिए विशेष हुनर होना आवश्यक है। यदि ड्राइवरों को बेहतर प्रशिक्षण प्रदान किया जाए तो एक साथ कई समस्याओं का समाधान हो सकता है। यूनिवर्सिटी के नीति-निर्धारकों के मुताबिक ड्राइवरों को प्रशिक्षित कर न केवल शहर में बढ़ते वाहनों के दबाव को बेहतर ढंग से नियंत्रित किया जा सकता है बल्कि लोगों को सुगम यातायात व्यवस्था भी उपलब्ध करायी जा सकती है। इसके अतिरिक्त इस काम में जुटे बड़ी तादात में लोगों की रोजी रोटी भी बरकरार रखी जा सकती है।

रिक्शा-टैक्सी चलाने के काम को भले ही आप आम काम समझते हों, लेकिन यह काम आम बिल्कुल नहीं है। बल्कि यूं कहें कि यह एक बेहद खास हुनर है जो सबके पास नहीं होता और जिसे सीखने के लिए विशेष प्रशिक्षण की जरूरत होती है तो गलत नहीं होगा। कम से कम नासिक के यशवंतराव चाह्वाण महाराष्ट्र ओपन यूनिवर्सिटी के विद्वानों का तो यही मानना है। यह यूनिवर्सिटी रिक्शा-टैक्सी चलाने को खास हुनर मानकर इस विषय में डिप्लोमा, एडवांस डिप्लोमा व स्नातक की प्रोफेशनल डिग्री देने की तैयारी हो रही है। कुछ दिनों के भीतर इस डिग्री कोर्स की औपचारिक शुरुआत भी कर दी जाएगी। कोर्स के पहले बैच का उद्घाटन फिल्म अभिनेता एवं डायलॉग लेखक कादिर खान से कराने की तैयारी है। ऐसा इसलिए क्योंकि कादर खान स्वयं कई हिंदी फिल्मों टैक्सी चालक की भूमिका निभा चुके हैं। इस कोर्स के वैश्विक महत्त्‍‌व को देखते हुए कॉमनवेल्थ ऑफ लर्निग के अध्यक्ष सर जॉन डेनियल खासतौर से इस समारोह में भाग लेने के लिए कनाडा से यहां आएंगे। वह विश्वविद्यालय के उपकुलपति डॉ. आर कृष्णकुमार के साथ इस डिग्री कोर्स में उपयोग में आनेवाली शिक्षण सामग्री का उद्घाटन करेंगे।

इस डिग्री कोर्स में प्रवेश पानेवाले विद्यार्थियों को सीडी एवं एफएम रेडियो कार्यक्रमों के जरिए शिक्षा देने की योजना बनाई गई है ताकि वह अपना काम करते हुए शिक्षा ग्रहण कर सकें। यूनिवर्सिटी का मानना है कि रिक्शा-टैक्सी चलाने के लिए महज ड्राइविंग स्किल होना ही आवश्यक नहीं। इसके लिए ट्रैफिक जाम जैसी खास परिस्थितयों में नियमों का पालन करने, वाहन खरीदने, बैंक लोन लेने, लाइसेंस आदि प्राप्त करने के नियमों आदि की जानकारी भी उपलब्ध करायी जाएगी। यूनिवर्सिटी के प्रवक्ता श्रीनिवास बेलसरे के अनुसार करीब दो लाख ड्राइवरों के इस कोर्स से लाभ उठाने की उम्मीद की जा रही है। इसकी शुरुआत रिक्शा-टैक्सी ड्राइवरों से की जा रही है। लेकिन ट्रकों एवं बसों के ड्राइवर भी इसका लाभ ले सकते हैं। विशेष तौर पर ऐसे ड्राइवर, जिनकी शिक्षा अधूरी रह गई हो। बेलसरे के अनुसार बीए इन रोड ट्रांसपोर्टेशन नामक इस डिग्री कोर्स के पहले वर्ष में विद्यार्थियों को डिप्लोमा कोर्स का प्रमाणपत्रप्रदान किया जाएगा। दूसरे वर्ष के बाद एडवांस्ड डिप्लोमा प्रमाणप वतीसरे वर्ष की समाप्ति पर ग्रेजुएशन की डिग्री प्रदान की जाएगी। कोर्स में प्रवेश के लिए विवि प्रशासन रिक्शा-टैक्सी चालकों के संगठनों एवं यूनियनों से भी संपर्क में है ताकि उनके सदस्य यह डिग्री हासिल कर अपना काम पूरी दक्षता से कर सकें। यूनिवर्सिटी की योजना यदि परवान चढ़ी तो यह रिक्शा-टैक्सी चालकों सहित टाऊन प्लानरों के लिए भी काफी मददगार साबित होगी।

- अविनाश चंद्र