चंद किस्सों के बहाने

सोशल मीडिया की उपयोगिता के सैकड़ों आयाम हैं। यह उपयोगिता जब किसी को न्याय दिलाने या जीवन बचाने के मामले में दिखाई देती है, तो स्वाभाविक तौर पर इसका महत्व कई गुना बढ़ जाता है। ऐसा एक मामला बेंगलूर में दो दिन पहले सामने आया। पुलिस ने फेसबुक के जरिए दो सड़कछाप मवालियों को धर दबोचा। मामले की शुरुआत चंद दिनों पहले हुई थी, जब युवा अक्षय को अपनी दो महिला मित्रों के साथ सड़क पर दो लड़कों की बदतमीजी से जूझना पड़ा। बाइक सवार दो बदमाश महिलाओं से छेड़खानी कर भाग गए। इस दौरान अक्षय ने अपने मोबाइल से उनकी तस्वीरें ले लीं और फेसबुक पर पोस्ट कर दिया।

महज 48 घंटों में 15 हजार से ज्यादा लोगों ने इस पोस्ट को लाइक व शेयर किया। फेसबुक पर लोगों का आक्रोश देख अक्षय ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने मामले की नजाकत को समझते हुए फौरन लड़कों को ढूंढ़ना शुरू किया। इन दोनों बदमाशों ने घर बदल दिया, लेकिन पुलिस ने मोबाइल रिकॉर्ड के जरिये इन्हें पकड़ अदालत में पेश किया गया, जहां इन्हें दोषी मानते हुए जुर्माना किया गया। फेसबुक और ट्विटर जैसे मंचों पर बात जंगल में आग की तरह फैलती है।

फेसबुक पर जान बचाने का भी एक दिलचस्प किस्सा सामने आया है। बात ब्रिटेन के ऑक्सफोर्ड का है, जहां एक स्कूली छात्र ने आत्महत्या की कोशिश की। फेसबुक पर स्टेटस के तौर पर उसने लिखा, मैं अब बहुत दूर जा रहा हूं। वह करने जिसके बारे में मैं काफी समय से सोच रहा था। लोग मुझे खोजेंगे। अमेरिका में बैठी छात्र की ऑनलाइन मित्र ने यह संदेश पढ़ा। उसे नहीं मालूम था कि छात्र ब्रिटेन में कहां रहता है? लड़की ने अपनी मां को इस बारे में फौरन बताया। मां ने मेरीलैंड पुलिस को सूचित किया। पुलिस ने व्हाइट हाउस के स्पेशल एजेंट से संपर्क साधा और उसने झटके में वाशिंगटन में ब्रिटिश दूतावास के अधिकारियों से। उन्होंने ब्रिटेन की मेट्रोपॉलिटन पुलिस से संपर्क किया और इस बीच छात्र के घर का पता लगाकर टेम्स वैली के पुलिस अधिकारी उसके घर जा पहुंचे। पुलिस अधिकारियों के पहुंचने से पहले छात्र नींद की कई गोलियां खा चुका था। उसके मुंह से खून आ रहा था। आधिकारियों ने आनन-फानन में छात्र को अस्पताल पहुंचाया, जहां आखिरकार उसकी जान बच गई।

एक और मामला है मुंबई का। एक कॉलेज के छात्र नीतेश भुकुटा ने फेसबुक की मदद से चोरों को पकड़वा दिया। हुआ यूं कि अचानक तीन अजनबी उनके घर में घुस आए। वे ड्राइंग रूम में घुस गए, जहां नीतेश की दादी और बहन बैठी थीं। चोरों ने उन्हें कब्जे में ले लिया। यहीं नीतेश का मोबाइल फोन और लैंडलाइन फोन भी था। फुर्ती दिखाते हुए नीतेश चोरों से आंख बचाते हुए लैपटॉप लेकर अटारी (टांड) पर चढ़ गया। वाई-फाई चालू था। नीतेश ने फेसबुक पर स्टेटस अपडेट किया, जिसे कुछ दोस्तों ने पढ़ा और फौरन पुलिस को सूचित किया। चंद मिनटों में पुलिस ने चोरों को धर दबोचा। इस तरह के कई किस्से हैं, जहां एक छोटे से स्टेटस अपडेट ने सोशल मीडिया के जरिये बड़ा काम कर दिखाया। सच है कि इन किस्सों में सोशल मीडिया के मंच सिर्फ माध्यम भर हैं, क्योंकि कोशिश तो इस तंत्र और इंसान ने ही की है, लेकिन इससे भी इन्कार नहीं किया जा सकता कि सोशल मीडिया ने भौगोलिक सरहदों के साथ-साथ, ऊंच-नीच और अमीरी-गरीबी की सरहदों को भी तोड़ा है।

मदद के लिए मांग उठी तो मददगार अलग-अलग रूपों में खड़े दिखे। जरूरत अब सोशल मीडिया के व्यापक उपयोग को समझने की है। इस बात की भी कि सोशल मीडिया को इस रूप में भी समझा जाए कि यह हमारी समस्याओं का किस तरह हल कर सकता है। यकीन मानिए, कई परेशानियों का हल यहां मौजूद है।

- पीयूष पांडेय (लेखक वरिष्ठ पत्रकार व सोशल मीडिया विशेषज्ञ हैं)
साभारः दैनिक जागरण