धार्मिक प्रतीक चिन्हों की स्वतंत्रता

सिख बच्चों के स्कूल में पगड़ी पहनने पर फ्रांस में लगा प्रतिबन्ध फिलहाल जारी रहेगा और इसी के साथ दुनिया में धार्मिक स्वतंत्रता पर पाबंदी का प्रश्न एक बार फिर उठता है। फ्रांस के स्कूलों में सिख छात्रों को पगड़ी पहनने की अनुमति देने की समुदाय की माँग के बीच फ्रांस के संस्कृति मंत्री ने सोमवार को कहा कि उनके यहाँ नियम के मुताबिक स्कूलों में धार्मिक प्रतीकों के प्रदर्शन पर पाबंदी है।

भारत यात्रा पर आए फ्रांस के संस्कृति मंत्री फ्रेडरिक मितराँ ने कहा कि कि वह सिख समुदाय का सम्मान करते हैं पर उनके देश में ऐसा नियम है जिसमें स्कूलों में धार्मिक प्रतीकों पर पाबंदी है। सिख समुदाय लंबे समय से फ्रांस के स्कूलों में सिख छात्रों को पगड़ी पहनने की इजाजत देने की मांग करता रहा है। प्रधानमंत्री से भी फ्रांसीसी राष्ट्रपति के सामने यह मुद्दा उठाने की मांग की जा रही थी।

धर्म की स्वतंत्रता का अधिकार एक मौलिक हक है और पगड़ी सिखों की मुख्य पहचान है. जो पश्चिमी देश धार्मिक आज़ादी और लोकतंत्र के नारे देते हैं, कम से कम उन से तो यह उम्मीद की जा सकती है कि वो पगड़ी जैसे धार्मिक प्रतीक पर रोक नहीं लगायेंगे। पगड़ी पर प्रतिबंध सिखो की धार्मिक स्वतंत्रता का दमन और समुदाय को मूल अधिकारों से वंचित करना है। सिख समुदाय पगड़ी के लिए अपनी लड़ाई अमेरिका में भी लड़ रहा है। अमेरिकी परिवहन सुरक्षा प्राधिकरण (टीएसए ) द्वारा हवाई अड्डों पर सिखों की पगड़ियों की अलग से जांच किए जाने संबंधी हालिया निर्देश के विरोध में सिख समुदाय उठ खड़ा हुआ है। निर्देश के अनुसार सिखों को फुल बॉडी इमेज स्कैनरों से गुजरने के बाद अपनी पगड़ी की जांच करवानी पड़ेगी। इसे भेदभाव पूर्ण फैसला बताते हुए विश्व भर के सिख समुदाय ने जल्द से जल्द ये निर्देश वापस लेने की मांग की है। अमेरिका के ही ओरेगोन प्रान्त में एक विधेयक पारित होकर गवर्नर के पास मंज़ूरी के लिए भेजा गया है जिसके तहत शिक्षकों को पगड़ियों और सिख समुदाय के अन्य विशिष्ट परिधानों सहित धार्मिक पहनावा धारण करने से रोकने का प्रावधान है।

इस से पूर्व 9/11 की आतंकी घटना के बाद भी अमेरिका में सिखों के साथ हिंसा की घटनाएं हुई थीं। अमेरिकियों ने सिखों को पगड़ी पहना देख मुस्लिम आतंकवादी समझा और उन पर हमला किया, जिन में कुछ की जान भी गयी थी।

सिख नेताओ का कहना है कि पगड़ी प्रत्येक सिख का धार्मिक चिन्ह है और इसका अपमान समूचे विश्व के करोड़ों सिखों की धार्मिक भावनाओं से खिलवाड़ करने के समान है।

धार्मिक स्वतंत्रता व्यक्तिगत आज़ादी और अभिव्यक्ति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। बुर्का, पगड़ी और अन्य धार्मिक पोशाकें किसी भी व्यक्ति का अपना चयन है और जब तक वो किसी संकट को जन्म नहीं दे रहा है, तब तक सरकारों को कोई आपत्ति नहीं होनी चाहिए।

- स्निग्धा द्विवेदी