भरता घड़ा और उफनता जनाक्रोश

भ्रष्टाचार विरोधी जनलोकपल बिल के लिए प्रदर्शन कर रही अन्ना हजारे और उन की टीम ने जैसे ही सरकार के साथ रामलीला मैदान में अनशन करने संबंधी समझौता होने की घोषणा की, वैसे ही मैदान में तैयारियां जोर-शोर से शुरू हो गयी हैं. तिहाड़ जेल में दो रात गुजारने के बाद दिल्ली के रामलीला मैदान में समाजिक कार्यकर्ता हजारे को एक पखवाड़े के लिए अनशन करने की अनुमति दे दी गयी है. हजारे कल रामलीला मैदान पहुंचेंगे.

गत 16 अगस्त को गिरफ्तार होने के बाद हज़ारे तिहाड़ जेल ले जाये गये थे पर बाद मे रिहाई का आदेश दिए होने के बावजूद उन्होने जेल से बाहर आने से इंकार कर दिया. लेकिन कल देर रात दिल्ली पुलिस के साथ हजारे टीम के लोगों की बैठक के बाद 14 दिनों के अनशन के पुलिस के प्रस्ताव को मंजूर कर लिया गया और गतिरोध समाप्त हो गया.

भ्रष्ट्राचार के खिलाफ आजादी की दूसरी लड़ाई में पिछले कुछ दिनों मे देश भर मे लोग अन्ना हजारे के समर्थन में सड़कों पर उतर आए. ‘जन लोकपाल बिल लागू करो’, ‘भ्रष्ट्राचार को जड़ से खत्म करो’, ‘सरकारी लोकपाल धोखा है, देश बचा लो मौका है’ जैसे नारे लगाते युवा, छात्र, वृद्ध, पेशेवर, व्यापारी वर्ग, घरेलू महिलाओ ने अन्ना के संघर्ष का अभूतपूर्व समर्थन किया और एक मज़बूत जन लोकपाल विधेयक लागू करने की मांग करी।

अन्ना के आंदोलन का उद्देश्य सही है. आम आदमी भ्रष्टाचार से त्रस्त हो चुका है और सभी को यही लग रहा है कि जंग में अगर हम इस बार चूक गए तो दूसरा मौका पता नहीं कब आएगा. अन्ना की गिरफ्तारी का हर वर्ग ने पुरज़ोर विरोध किया तथा इसे लोकतांत्रिक मूल्यो क हनन बताया. लोकपाल बिल पर दोनो पक्षों में जो भी विरोध हो, सरकार का एक शांतिपूर्ण प्रदर्शन पर लगाया जा रहा नियंत्रण किसी को नहीं भा रहा. दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र कहलाने वाले देश में ऐसा होना काफी दुख का विषय है. एक डरी हुई सरकार व पार्टी का रवैया एकदम असंगत प्रतीत होता है. बाबा रामदेव के जून आन्दोलन के दौरान भी सरकार ने आपत्तिजनक व्यवहार प्रदर्शित किया था.

आपातकाल जैसा कुछ होने की संभावना तो नहीं है, पर अन्ना के आंदोलन के साथ अब तक सरकार के व्यवहार से 37 वर्ष पुरानी यादें ताजा हो गई हैं जब जयप्रकाश के आंदोलन को भी इसी अंदाज में दबाने की कोशिश हुई थी. जयप्रकाश से टकराना कांग्रेस और इंदिरा गांधी के लिए महंगा साबित हुआ था और आशंका यही है कि इस पूरे प्रकरण में जिस तरह यूपीए सरकार और कांग्रेस नेताओं की अपरिपक्वता और अहंकार की मानसिकता उजागर हुई है, वो वर्तमान सत्ता के लिए बहुत महंगा सौदा साबित होगी.

- स्निग्धा द्विवेदी