मंदिर की संपत्ति किसी और की नहीं

केरल के पद्मनाभन मंदिर में मिली अकूत सम्पदा की चर्चा आजकल सबकी जुबान पर है. राजधानी तिरुवनंतपुरम स्थित पद्मनाभन स्वामी मंदिर में एक लाख करोड़ से ज्यादा का खज़ाना मिला है। 16वीं सदी के इस मंदिर के भूमिगत तहखानों से अरबों रुपए के हीरे, सोना और चांदी बरामद हुई है. मंदिर के चार में से दो तहखानों को पिछले 130 वर्षों से खोला नहीं गया था. सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर एक सात-सदस्यी समिति को इनमें मौजूद चीज़ों का आकलन करने का आदेश दिया गया था. त्रावणकोर के सभी शासकों ने पद्मनाभ-दासन अर्थात पद्मनाभ के दास के रूप में शासन किया। भारत की स्वतंत्रता के बाद त्रावणकोर राजघराने के लोग के नेतृत्व में एक ट्रस्ट मंदिर का कामकाज देखता है.

कहा जाता है कि ट्रावनकोर राजाओं ने ब्रिटिश शासकों से बचाने के लिए विशाल खजाना इस मंदिर के तहखाने में छुपा कर रखा था। यह धन अकाल जैसी आपदा के समय खर्च करने के लिए था। इस संपत्ति को लेकर जिज्ञासा तो है ही, साथ ही सवाल इस धन के उपयोग का भी है। बहुत सारे लोगो का ये कहना है कि यह धन देश का है और इस को देश के कल्याण और विकास में खर्च किया जाना चाहए पर देखा जाये तो ये धन भगवान पद्मनाभ का है तो फिर इसका राष्ट्रीयकारण क्यों किया जाना चाहिए?

ये हर हाल में ट्रस्ट की ही संपत्ति है और सरकार को इस पर अधिकार जमाने का हक नहीं बनता. अगर इस तरह ही चले तो मस्जिद, चर्च, गुरूद्वारे जैसी हर धार्मिक जगह पर भी सरकार अपना कब्ज़ा जमा ले. वर्षों से इश्वर के प्रति अपनी आस्था से चढ़ाये गए धन इत्यादि का क्या सही इस्तेमाल होता है ये मंदिर की ट्रस्ट के विवेक पर ही छोड़ देना चाहिए. हालाँकि सरकार को ध्यान देना चाहिए की मंदिर जैसे सार्वजनिक ट्रस्ट अपनी संपत्ति का संपूर्ण लेखा जोखा दिया करें. किसी भी अन्य संस्था की तरह मंदिर ट्रस्ट को भी पूरी जवाबदेही के साथ साल में एक बार अपनी आय और व्यय का ब्यौरा देना चाहिए. और एक बार मंदिर की संपत्ति का ब्योरा जनता के सामने आ जाएगा तो सम्भावना है कि ट्रस्ट अपने पैसे को समाज की बेहतरी के लिए लगाने के लिए एक नैतिक दबाव महसूस करे.

दूसरी तरफ पुरातात्विक महत्व की जो वस्तुओ पायी गयी हैं उनका संरक्षण निर्धारित एजेंसी को करना चाहिये. ऐसी पुरातात्विक महत्व की वस्तुओं का अकादमिक महत्व भी बहुत होता है। बेशकीमती चीजों को रुपये में तब्दील करना किसी भी तरह अर्थव्यवस्था के हित में नही होगा. जो पौराणिक मूर्तियाँ व अन्य ऐतिहासिक वस्तुएं खजाने से प्राप्त हुयी हैं उन्हें सरकार को लोन के तहत दे कर संग्रहालयों की शोभा भी बढ़ायी जा सकती है.

- स्निग्धा द्विवेदी