एक खुला पत्र मुख्यमंत्री के नाम

आदरणीय मुख्यमंत्री  राजस्थान,

विषयः शिक्षा का अधिकार

माननीय,

सादर अभिवादन,

प्रदेश में शिक्षा, खासकर बालिका शिक्षा को लेकर आप काफी संवेदनशील हैं। आपका लगातार प्रयास है कि शिक्षा के क्षेत्र में राजस्थान देश का सबसे अग्रणी राज्य बने। अब तो राज्य में शिक्षा का अधिकार कानून भी लागू हो गया है। शिक्षा को बेहतर बनाने के लिए आपने न केवल शिक्षकों के खाली पद भरे हैं, बल्कि स्कूलों में आधारभूत सुविधाएं भी उपलब्ध कराने का प्रयास किया है। यहां तक कि सरकारी स्कूलों में अध्यापक- अभिभावक परिषदों का गठन भी किया जा रहा है, ताकि अभिभावक खुद स्कूलों की व्यवस्था संभालें और देखरेख कर सकें।

राजस्थान में सरकारी स्कूलों का महत्व बढ़ाने और शिक्षा पर खर्च की जाने वाले सरकारी धन के सदुपयोग के लिए मैं भी कुछ सुझाव देना चाहता हूं। उम्मीद है आपको पसंद आएंगे।

  1. सभी सरकारी कर्मचारियों और अधिकारियों को पाबंद किया जाए कि उनके बच्चे सरकारी स्कूलों में ही पढेंगे। इसके लिए दो बच्चों की फीस का पुर्नभरण किया जा सकता है। निजी स्कूलों में यदि किसी अधिकारी-कर्मचारी के बच्चे पढ़ते हुए पाए जाएं तो न केवल पुर्नभरण की गई राशि की वसूली हो, बल्कि उसी सभी पदोन्नतियां रोक दी जाएं। इससे सरकारी अधिकारी और कर्मचारी स्कूलों और व्यवस्थाओं का विशेष ध्यान रखेंगे। 
  2. सरकारी स्कूलों में सालभर शत-प्रतिशत उपस्थित रहने वाले छात्रों को राज्य स्तर पर सम्मानित करने के साथ ही छात्रवृत्ति अथवा अन्य प्रोत्साहन राशि देकर उत्साहित किया जाए। 
  3. जिस स्कूल का परीक्षा परिणाम सबसे ज्यादा खराब हो, उस विद्यालय के अध्यापकों के सजा के तौर पर दूरदराज वाले इलाकों में तबादले किए जाएं। फिर उन्हें अपने गृह जिले में आने की अनुमति नहीं मिले। 
  4. प्रारंभिक शिक्षा हाल ही पंचायतीराज संस्थाओं को सौंपी गई है। नई भर्तियां भी की जा रही हैं। इसमें जिला कैडर की व्यवस्था हो। इसमें 90 प्रतिशत स्थानीय युवाओं को ही प्राथमिकता दी जाए। इससे ग्रामीण युवाओं को उनके क्षेत्र में ही रोजगार मिलेगा। 
  5. पिछले कार्यकाल की तरह ही स्कूलों में अध्यापकों की उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए ग्राम स्तरीय समिति जिसमें रिटायर्ड सरकारी कर्मचारी, पटवारी, ग्राम सेवक, सरपंच आदि हों, से हर माह उपस्थित का वेरिफिकेशन कराया जाए। 
  6. बेहतर परीक्षा परिणाम देने वाले सरकारी स्कूलों में राज्य स्तरीय प्रतिस्पर्द्धा हो। इसके लिए उन्हें निर्मल ग्राम योजना की तर्ज पर राज्य स्तर पर पुरस्कृत किया जा सकता है। पुरस्कार स्वरूप विद्यालय में मूलभूत सुविधाओं के लिए और विद्यालय स्टाफ को प्रोत्साहन राशि दी जा सकती है। इससे सरकारी स्कूलों में राज्य स्तर पर पुरस्कृत होने की प्रतिस्पर्द्धा बढेगी। 
  7. सरकारी स्कूलों में जन प्रतिनिधयों का हस्तक्षेप कम हो, ताकि वहां किसी तरह की राजनीति न हो सके। बेहतर परिणाम देने के लिए अध्यापक यदि अतिरिक्त क्लास लेकर बच्चों के साथ मेहनत करता है तो उसे राज्य स्तर पर सम्मानित किया जाना चाहिए। 
  8. शिक्षा के क्षेत्र में खासकर विद्यालयों में दी जाने वाली राशि का सामाजिक अंकेक्षण कराया जाना चाहिए। इसमें जिला, तहसील और ब्लॉक स्तर पर पत्रकारों का भी सहयोग लिया जाना चाहिए। उन्हें भी अभिभावक अध्यापक परिषद से जोड़ा जा सकता है।

- गिरिराज अग्रवाल