आयात निर्यात में सरकारी हस्तक्षेप से खराब होती है साख

देश में प्याज की बढ़ती कीमतों पर लगाम लगाने के लिए केंद्र सरकार ने फिलहाल प्याज के निर्यात पर रोक लगा दी है। इसके साथ ही थोक व खुदरा व्यापारियों के लिए प्याज के भंडारण की नई सीमा भी तय कर दी है। नए नियम के तहत खुदरा व्यापारी जहां 2 टन प्याज का भंडार कर सकते हैं वहीं थोक व्यापारियों के द्वारा भंडारण की सीमा 25 टन निश्चित की गई है। यह तब है जबकि कुछ ही समय पूर्व प्याज सहित अन्य वस्तुओं को आवश्यक वस्तु अधिनियम से बाहर करते हुए इसके भंडारण की अधिकतम सीमा को समाप्त कर दिया गया था। सरकार के इस कदम से व्यापारी खासे नाराज हैं विरोध स्वरूप नासिक की सभी 15 कृषि उपज विपणन समितियों (एपीएमसी) में प्याज की निलामी में हिस्सा नहीं ले रहे हैं। एशिया की सबसे बड़ी प्याज मंडी लासलगांव भी शामिल है। 

इस विषय पर आज़ादी.मी ने शेतकारी संगठन के प्रवक्ता और किसान नेता ललित पाटिल बहाले से बात की और उनकी राय जानी। ललित पाटिल बहाले ने कहा कि ‘कोविड19 के कारण ठप्प पड़ी अर्थव्यवस्था में जान डालने के लिये केंद्र सरकार ने कृषि के क्षेत्र में सुधार लाने के लिए कुछ संशोधन किये थे। उनमें से एक प्याज को आवश्यक वस्तु अधिनियम से बाहर करते हुए इसके भंडारण पर से रोक हटाना था। यानी कि अब कोई भी प्याज को जितनी मात्रा में चाहे, स्टॉक कर सकता था। हालांकि इसमें एक क्लॉज यह था कि यदि प्याज की कीमतों में 100 फीसदी से अधिक वृद्धि होने पर सरकार इसमें बदलाव कर सकती थी इसके लिए पिछले एक वर्ष के दौरान की कीमत या फिर पिछले पांच वर्ष की कीमत के औसत को आधार माने जाने की बात हुई थी।’

‘प्याज की कीमत को नियंत्रित करने का यह आधार हालांकि पूरी तरह सही नहीं है। सबसे पहले तो सरकार को कीमत पर नियंत्रण के बारे में सोचना ही नहीं चाहिए। लेकिन राजनीति और चुनावों को ध्यान में रखते हुए सरकार यदि ऐसा कदम उठाती भी है तो उसे कम से कम पिछले पांच वर्ष के दौरान की महंगाई की दर और रुपये और डॉलर की कीमतों के बीच के अंतर पर भी विचार किया जाना चाहिए।’

‘सरकार द्वारा बार बार प्याज के आयात निर्यात की प्रक्रिया में हस्तक्षेप करने से इस क्षेत्र में व्यापार करने वालों के सामने साख का संकट उत्पन्न हो जाता है। व्यापारी किसी देश को जिस मात्रा में प्याज निर्यात करने का करार कर लेता है उसमें विघ्न पड़ने से व्यापार करना मुश्किल हो जाता है। खरीददार देश के व्यापारी भी करार को लेकर असमंजस में होते हैं। उन्हें विश्वास नहीं हो पाता कि हम करार को पूरा कर भी पाएंगे या नहीं। सरकार को सलाह है कि निर्यात व भंडारण की सीमा पर रोक लगाने की बजाए प्याज की जरूरतों को पूरा करने के लिए आयात के विकल्प पर गौर करे।’ 

लित पाटिल से बातचीत को देखने के लिये क्लिक करें https://www.facebook.com/www.azadi.me/videos/812341259309371

- आजादी.मी