व्यंग्यः क्या करे दिल्ली और मुंबई से बाहर का गरीब

आज हिंदुस्तान का गरीब आदमी का पास दो शानदार ऑप्शन मौजूद है। पेट कितना में भरे- 12 रुपया में या 5 रुपया में? एक नेता बोलता है कि मुंबई में 12 रूपया में पेट भरकर खाना मिलता है। दूसरा नेता बोलता है दिल्ली में 5 रुपया में पेट भरा जा सकता है। यानी मुंबई और दिल्ली का गरीब लोग का प्रॉब्लम तो सॉल्व हो गया। पन, जो आदमी दिल्ली या मुंबई में नहीं रहता वो किधर पेट भरे? ये पता लगाने का वास्ते मैं एक ऐसा जगह गया जो दिल्ली और मुंबई के ठीक बीच में है।
मेरे को उधर एक आदमी मिला जो गरीब लगता था। मैंने पूछा, 'तुम गरीब है'? 'हां।' 'तुम्हारा खीसा में कितना रूपया है?' वो बताने में हिचकिचाने लगा। मैं बोला, 'फिकिर मत करो। मैं तुमसे पैसा नहीं मांगेगा। ये देश में गरीब आदमी से सिरफ वोट मांगा जाता है।' वो बोला, 'फिर तुमने कायकू पूछा- तुम्हारा पास कितना पैसा है?' 'ताकि मैं जान सके कि तुम किधर पेट भरकर खा सकता है। पांच रुपया है तो दिल्ली में और 12 है तो मुंबई में।' 'मेरे पास बारह है।' 'तब तो तुम पेट भरकर खाने का वास्ते मुंबई जा सकता है।' 'नहीं, मैं दिल्ली जाएंगा।' 'कायकू?' 'कारण मेरा पास 12 रुपया है। मैं दिल्ली में 5-5 रूपया में दो दिन पेट भर कर खाएंगा और साथ में दो रूपए बी बचा लेंगा। दिल्ली जाने से मेरे को फायदा होएंगा।' और, लोग समझता है कि दिल्ली जाने से सिरफ नेता लोग को फायदा होता है।
ये जरूरी नहीं है कि हर गरीब दिल्ली जाना चाहेंगा। इस कारण मैंने एक और गरीब को पूछा, 'तुमने टीवी पर पेट भरने का न्यूज तो देखा होएंगा ! तुमको वो खबर कैसा लगा?' 'मेरे को तो 12 रुपया वाला नेता भोत अच्छा लगा।' ' कायकू?' 'कारण, जब वो खाने का बात बोल रहा था तो खाने का एक्टिंग भी कर रहा था। भोत अच्छा एक्टिंग था।'
'अच्छा तो होएंगा ईच। नेता बनने से पहले वो नामचीन एक्टर था।' 'तबी तो उसने गरीब आदमी का खाने का बड़ा असली एक्टिंग किया।' 'असली एक्टिंग मतलब?' 'मतलब, वो हाथ तो मुंह का बाजू में ले जा रहा था, पर हाथ में निवाला नहीं था।' तीसरा गरीब को वो 5 रूपया में खिलाने वाला नेता भोत अच्छा लगा। मैंने पूछा, 'वो नेता में तुमको भोत अच्छा क्या लगा?' 'उसका झक्क सफेद, स्टार्च लगा टोपी।' मैं बोला, 'तुम तो अजीब आदमी है। वो नेता खाने की बात बोल रहा था और तुम उसका टोपी देख रहा था। कायकू?' 'कारण मैं धोबी है।' 'तुम धोबी है तो ये बताओ- ऐसा झक्क सफेद टोपी कितना में धुल जाएंगा?' 'पांच रूपया में।' 'तब तो तुम्हारा मजा हो गया। तुम सीधा दिल्ली जाओ। रोज बस एक टोपी धोना और पेट भर कर खाना। अगर, दो टोपी धोने को मिल जावे तो तुम शादी बी कर सकता है। और, रोज का चार टोपी मिल जावे, तो तुम्हारा 'हम दो हमारा दो' भी पेट भर कर खा सकता है।'
हमारा देश में सबी गरीब सीधा नहीं होता। कुछ शक्की बी होता है। जब मैंने चौथा गरीब को पूछा, 'तुम कितना में पेट भरना पसंद करेंगा- 12 रुपया में या 5 रुपया में?' उसने मेरे को घूर कर देखा- '12 रुपया? 5 रुपया? सच्ची???' उसने 12 का आगे सवाल का एक निशान लगाया था, 5 का आगे दो और सच्ची के आगे चार सवालिया निशान लगाया था। मैंने उसको चार विस्मय का निशान लगाकर जवाब दिया, 'हां, सच्ची !!!' 'पर ये कैसे सच हो सकता है?' 'कारण, ऐसा हमारा देश का दो बड़ा नेता लोग ने बोला है। और तुम जानता है- हमारा देश का नेता लोग सच बोलता है, सिरफ सच बोलता है, सच का सिवाय कुछ नहीं बोलता है।' सच्ची !!!
 
 
 
- यज्ञ शर्मा
साभारः नवभारत टाइम्स

 

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