जरूरी है पैसे का संचार

पैसा वैसे ही है जैसे शरीर में रक्त का संचार होता है। समाजरूपी शरीर में पैसेरूपी रक्त  का संचार होता है। यब वह रक्त है जो समाज को जीने के लिए सशक्त और जीवंत बनाता है।

आपने उस बीमारी के बारे में सुना होगा जिसमें रक्त रुक जाता है और उसका संचार नहीं हो पाता ।तब रक्त के थक्के जमने लगने हैं और वह ब्लाक हो जाते हैं और शरीर में रक्त का संचार नहीं हो पाता। तब आप लकवाग्रस्त हो जाते हैं ।यदि ह्रदय में थक्के जमने लगते हैं तो आप मृत्यु को प्राप्त हो जाते हैं।

यदि पैसा संचारित होता है ,एक हाथ से दूसरे हाथ में जाता है उसमें जितनी ज्यादा  गति हो उतना अच्छा,तब रक्ता संचार अच्छा होता है और जीवन स्वस्थ बनता है।जब संचार कम होता है तब थक्का जमता है।कहीं कोई आदमी जमा कर रहा है और शेयर नहीं कर रहा इससे ही रक्त संचार में थक्का पैदा होता है।मनुष्य खुद जी नहीं रहा है और रक्त को रोककर औरों को भी जीने नहीं दे रहा है।पैसे का संचार रूक गया है और रक्त का संचार जीवन है।रक्त का संचार रूक गया यानी तो वह मृत्यु है।

मैं उस समाज के पक्ष में हूं जिसमें  पैसा तेजी से दौड़ता है,कोई उसे पकड़कर नहीं बैठता।हर कोई उसका उपयोग करता है और इस पैसे के इस आसान नियम को याद रखता है कि आप उसका जितना उपयोग करते हैं उतना ही वह मूल्यवान हो जाता है।उदाहरणार्थ आप यहां बैठे हुए हैं और दस लोगों की जेब में सौ रूपये हैं और वे उसे अपने पास रखे रहते हैं तो वे केवल एक हजार रूपये हैंऔर मृतप्राय है  लेकिन यदि वे पैसे संचारित होते है और दो चक्कर लगाते हैं तो वे बीस हजार हो जाते हैं।यदि तीन चक्कर लगाते है तो तीस हजार हो जाते हैं।और चार चक्कर लगाते हैं ------वे जितना ज्यादा संचार करते हैं उतने ही ज्यादा वे हो जाते हैं।जब एक आदमी एक हजार रूपए रखता है वे हजार रूपए मृत हो जाते है।यदि वह उनका उपयोग करता है तो वे किसी और के पास जाते हैं और फिर वे उसके पास लौटकर आते हैं क्योंकि दूसरे भी उसका उपयोग कर रहे हैं।----हम पैसे का जितना उपयोग करते हैं उतना ही पैसा बहता है, संचारित होता है और समाज समृद्ध होता है।

अमेरिका सबसे समृद्ध देश है क्योंकि अमेरिका का विश्व का  सबसे कम कंजूस देश है ।वहां पैसा तेजी से संचार करता है। पैसा तेजी से संचार करता है क्योंकि हर आदमी उसके पास के पैसे का उपयोग करता है।और उस पैसे का भी उपयोग करता है जो उसे भविष्य में मिलनेवाला है।उस देश का समृद्ध होना स्वाभाविक है और भारत जैसे देशों का गरीब रहना स्वाभाविक है क्योंकि लोग पैसे से चिपके रहते हैं।यदि आप पैसे दबाए रखते हैं तो देश गरीब रहेगा।जब कोई पैसे का उपयोग नहीं करता पैसा रक्त के थक्के की तरह बन जाता है।

पैसा का उपयोग कीजिए।पैसा जितनी दूर तक जाता है उतना ही खूबसूरत हो जाता है।और वह बहुत दूर तक जाता है।

--ओशो