मोदी को अभी और सुधारनी है छवि

सुप्रीम कोर्ट ने गोधरा कांड के बाद 2002 में गुजरात में भड़की हिंसा और दंगों पर कथित निष्क्रियता के आरोपों पर मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ कोई आदेश जारी करने से इनकार कर दिया. अदालत चाहती है कि यह मुकदमा ट्रायल कोर्ट में चलना चाहिए.

इसी के साथ मोदी को एक बडी राहत मिली है और माना जा रहा है कि राष्ट्रीय राजनीति में उनके प्रवेश का रास्ता अब सुलभ हो गया है.

वर्ष-2002 के दंगो मे कांग्रेस के पूर्व सांसद एहसान जाफरी मारे गये थे. उन की पत्नी जाकिया जाफरी ने इसी सिलसिले में सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी और 63 अन्य लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने की मांग की थी. गुजरात दंगों की जांच के लिए गठित की गयी एसआईटी अपनी सीलबंद जांच रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट में पहले ही पेश कर चुकी थी. रिपोर्ट के विश्लेषण मे ऐसे कोई साक्ष्य नहीं मिले जिस के आधार पर मोदी के खिलाफ एफआईआर कराई जा सके.

भाजपा ने फ़ौरन इस फैसले की प्रशंसा करते हुए इसे ‘सत्य की विजय’ बताया और कहा कि अब यह साबित हो गया है कि राज्य में हुई सांप्रदायिक हिंसा में मोदी की कोई भूमिका नहीं थी. पार्टी ने मोदी को वर्षों से चले आ रहे दुष्प्रचार का शिकार बताया. मोदी ने भी प्रतिक्रिया में इश्वर को महान बताया (गाड इज ग्रेट) और कहा है कि राज्य में सामाजिक सौहार्द और भाईचारा बढ़ाने की जिम्मेदारी के तहत वह ‘सद्भावना मिशन’ शुरू करने जा रहे हैं. इस सद्भावना मिशन के अंतर्गत उन्होने निर्णय किया है कि वह 17 सितंबर से तीन दिवसीय उपवास करेंगे.

एक बार फिर सवाल वही उठता है कि अपने सुशासन के लिए जाने वाले मोदी को क्या उन के कल के लिए माफी दे दी जाने चाहिए. मोदी ने अभी तक गुजरात दंगो के लिए कभी कोई आधिकारिक माफी नहीं माँगी है. उलटे हमेशा उन को दुष्प्रचार और मिथ्या आरोपों का शिकार बतलाया गया है. गुजरात निरंतर विकास के आंकड़ों में ऊंचाई बनाये हुए है. बड़े बड़े बिजनेस वहाँ पर अनुकूल माहौल के चलते अपना काम शुरू करना चाहते हैं. मोदी की अपने गृह राज्य में लोकप्रियता का अंदाज़ा इस बात से लगाया जा सकता है कि वो बार बार निर्वाचित होकर लौटते हैं. गुजरात दंगों में गयी जानों के प्रति संवेदना रखते हुए हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि सुप्रीम कोर्ट जैसी संवैधानिक संस्था के फैसले का भी हमें सम्मान करना पड़ेगा. पर छवि सुधार की राह में यदि मोदी अल्पसंख्यकों के प्रति कोई और ठोस तथा मर्मपूर्ण कदम उठाएं तो बहुत अच्छा होगा. अच्छे प्रशासन के साथ साथ संवेदनशीलता  युक्त नेतृत्व उन्हें और आगे ले जाएगा.

- स्निग्धा द्विवेदी