सार्वजनिक नीति - अन्य लेख

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मैं जन्म से हिंदू हूं और आम मध्यवर्गीय माहौल में पला-बढ़ा। मैं अंग्रेजी माध्यम स्कूल में पढ़ा। मेरे दादा-दादी आर्यसमाज से जुड़े थे। हालांकि मेरे पिता ने दूसरा रास्ता अपनाया। इंजीनियरिंग की पढ़ाई के दौरान वह एक गुरु के प्रभाव में आ गए जिन्होंने ध्यान के माध्यम से भगवान से सीधे साक्षात्कार की संभावना के बारे में बताया। गुरु एक राधास्वामी संत थे, जो कबीर, नानक, मीराबाई, बुल्ले शाह और भक्ति व सूफी संप्रदाय के अन्य संत-कवियों की रचनाएं उद्द्धृत किया करते थे।

हमारे घर में ऊहापोह की स्थिति रहती थी। मेरी दादी हर सोमवार और बुधवार को

बेफिक्र हो जाइए। अमेरिका की क्रेडिट रेटिंग घटने के बावजूद वैश्विक अर्थव्यवस्था दोहरी मंदी (डबल-डिप रिसेशन) में फंसने नहीं जा रही है। हालांकि ग्लोबल इकनॉमी की रफ्तार सुस्त हो रही है। मुमकिन है कि लंबे समय तक आर्थिक रफ्तार सुस्त रहे। अक्सर जब वित्तीय संकट से मंदी शुरू होती है तो ऐसा होता है। ऐसे में शेयर बाजार में गिरावट खरीदारी का अच्छा मौका है। यह मंदी के निचले स्तरों तक नहीं जाएगा।

2 अगस्त को तकनीकी डिफॉल्ट से बचने के लिए अमेरिकी नेताओं के बीच वक्त रहते कर्ज सीमा बढ़ाने पर सहमति बन गई थी। आलोचकों का कहना था कि डेमोक्रेट और रिपब्लिकन नेताओं के

केरल के श्रीपद्मनाभ मंदिर से अकूत संपदा का प्राप्त होना दुनियाभर के लिए विस्मय का कारण बन गया है। इस संपदा का मूल्य एक लाख करोड़ रुपए आंका गया है, जबकि मंदिर का एक तहखाना खोला जाना अब भी बाकी है। इसके साथ ही श्रीपद्मनाभ मंदिर संपदा के मामले में तिरुपति सहित दुनिया के किसी भी अन्य धर्मस्थल से आगे निकल गया है। यदि कलात्मक महत्व के आधार पर मंदिर की संपदा का आकलन किया जाए तो यह आंकड़ा और बढ़ सकता है। कुछ पश्चिमियों के दिमाग में इस संपदा ने वैसा ही जादू जगाया है, जैसा कभी गोलकुंडा के खजाने ने जगाया था। इसी खजाने की खोज में क्रिस्टोफर कोलंबस भारत को ढूंढ़ने निकला था, लेकिन

नेताओं को समझना होगा कि भारत का नया मध्यवर्ग आत्मसम्मान के लिए लड़ने को तैयार है. वह अपने गुस्से को खुद जाहिर कर रहा है. जन भावना का दबाव राजनीतिक व्यवस्था व नेताओं को अस्थिर कर देगा या फ़िर एक वास्तविक राजनीतिक सुधार की नींव रखेगा.

एक साल पहले किसी ने कल्पना नहीं की होगी कि कई मंत्री, राजनेता, वरिष्ठ अधिकारी और सीइओ तिहाड़ जेल में होंगे और सुनवाई का सामना कर रहे होंगे. भारत में भ्रष्टाचार अब कोई नयी खबर नहीं है, यह आम प्रतिक्रिया अप्रत्याशित और एक पहेली की तरह है. यदि ऐसा है तो फ़िर घूसखोरी के खिलाफ़ अंतहीन आंदोलन क्यों हो रहे हैं? दरअसल, आज

देश में गरीब राज्यों को बेहतर जनसांख्यिकी लाभांश (डेमोग्राफिक डिविडेंड) मिल रहा है। इस बार की जनगणना में देश की जनसंख्या वृद्धि दर में कुछ कमी दर्ज की गई है। वर्ष 2001 की जनगणना में जहां जनसंख्या वृद्धि दर 21.54 फीसदी दर्ज की गई थी, वहां इस बार की जनगणना में यह दर 17.64 फीसदी दर्ज की गई है। सबसे अच्छी बात यह है कि 0-6 वर्ष तक के बच्चों की संख्या में 3.08 फीसदी की कमी आई है।

बच्चों की संख्या में कमी होने से किसी भी क्षेत्र को जनसांख्यिकी लाभांश हासिल होता है, जिसके कारण आने वाले दशक में उन क्षेत्रों में प्रति व्यक्ति आय में काफी वृद्धि होगी। छह

सोवियत यूनियन और इसके साम्यवादी साम्राज्य के अंत की 20 वीं सालगिरह से पहले उसके सिद्धांतों पर चलने वाले भारत के एक राज्य पश्चिम बंगाल में भी साम्यवादी शासन ध्वस्त हो गया। चुनाव के बाद बृंदा करात के विश्लेषण से साफ जाहिर हुआ कि सीपीएम पहले सोवियत संघ और बाद में पश्चिम बंगाल में हार की वजहों से आंखें मूंदे बैठा है।

ब्रिटिश साम्राज्यवादी दावा करते हैं कि वे पिछड़ी नस्ल की आबादी में सभ्यता का प्रसार कर रहे थे। वामपंथी साम्राज्यवादियों ने भी उन लोगों के उत्थान का दावा किया, जिनमें क्रांतिकारी चेतना का अभाव था। अलबत्ता, पिछड़ी हुई नस्लों ने

लोग अगर पूरी तरह स्वतंत्र हों तो सबसे ज्यादा प्रतिभावान ( और सौभाग्यशाली ) लोग सबसे सुस्त और दुर्भाग्यशाली लोगों से कहीं ज्यादा अमीर होंगे। यानी स्वतंत्रता से असमानता पैदा होगी। कम्युनिस्ट देशों ने तानाशाही नियंत्रण के जरिए समाज में समता लाने का प्रयास किया , लेकिन वह पाखंड मात्र था। इन देशों में नियम बनाने वालों और उनका पालन करने वालों के बीच ताकत की कोई समानता मौजूद नहीं थी। स्वतंत्रता और समानता के बीच का तनाव कम करने के लिए देशों को अवसरों की समानता लाने का लक्ष्य लेकर चलना होता है , परिणाम की समानता का नहीं। इसके बावजूद अर्थशास्त्री लगभग हर जगह विषमता का आकलन

मैंने ओसामा बिन लादेन की मौत का जश्न नहीं मनाया। किसी विचार को खत्म करने से कहीं ज्यादा आसान है, किसी व्यक्ति को मार देना। ओसामा की मौत के बाद भी उसके जेहाद की विचारधारा जिंदा रहेगी।

वो 9/11 का मास्टरमाइंड था और जेहाद की दुनिया का सबसे बड़ा चेहरा बन चुका था। हालांकि लंबे वक्त से वो जेहादी गतिविधियों से सीधे तौर पर नहीं जुड़ा था, लेकिन इस बीच उसने अलकायदा के विरोधी मुस्लिमों की हत्या करवाने का घृणित काम किया था।

इस सबके बावजूद ओसामा एक नये तरह के जेहाद के प्रति लोगों का आकर्षण पैदा करने में कामयाब रहा।

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