सार्वजनिक नीति - अन्य लेख

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डा.बाबासाहब अंबेडकर मूलत: अर्थशास्त्री थे ।उनकी सारी डिग्रियां अर्थशास्त्र की हैं।1926 में जब वे विधानमंडल में गए तो उन्होंने साहूकारी नियंत्रण कानून और एक और महत्वपूर्ण बिल पेश किया था क्योंकि इस द्रष्टा महामानव को यह लगता था कि सामान्य  आदमी आर्थिक गुलामी से मुक्त हो और आर्थिक समानता स्थापित हो। यह तभी संभव है जब निम्नवर्ग उद्योजक के रूप में उभरेगा और  अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के लिए  अन्य उद्योगपतियों के साथ कंधे से कंधा लगा कर खड़ा होगा। इसके लिए आज मुक्त अर्थव्यवस्था ने  हमें अवसर भी प्रदान किया है। अब  दलितों को पूंजीवाद को

प्रतिबंधित नक्सली संगठन भाकपा-माओवादी ने दैनिक जागरण की ओर से उठाए गए सवालों के जैसे जवाब दिए हैं उनसे यह और अच्छे से साबित हो रहा है कि नक्सली नेता वैचारिक रूप से बुरी तरह पथभ्रष्ट हो चुके हैं और वे अपनी ही बनाई दुनिया में रह रहे हैं। वे लोकतांत्रिक व्यवस्था को ध्वस्त कर न केवल सत्ता हथियाने का मंसूबा पाले हुए हैं, बल्कि ऐसा व्यवहार कर रहे हैं जैसे उन्होंने सत्ता संचालन का अधिकार वैधानिक तरीके से अर्जित कर लिया है। यदि वे इस खुशफहमी में नहीं होते तो सगर्व यह नहीं कह रहे होते कि फिरौती-उगाही करना इसलिए जायज है, क्योंकि उन्हें इतने बड़े तंत्र को चलाना पड़ रहा है। वे जिसे

एक मित्र ने पूछा है कि इतने गरीब है इनकी जिम्मेदारी अमीरों पर नहीं है?

मैं आपसे कहता हूं, बिल्कुल नहीं है। इनकी जिम्मेवारी इन गरीबों पर ही है। इसको थोड़ा समझ लेना जरूरी होगा।

बड़े मजे की बात है कि किसी गांव में दस हजार गरीब हो और दो आदमी उनमें से मेहनत करके अमीर हो जाएं तो बाकी नौ हजार नौं सौ निन्यानबे लोग कहेंगे कि इन दो आदमियों ने अमीर होकर हमको गरीब कर दिया। और कोई यह नहीं पूछता कि जब ये दो आदमी अमीर नहीं थे तब तुम अमीर थे? तुम्हारे पास कोई संपत्ति थी जो इन्होंने चूस ली। नहीं तो शोषण का मतलब क्या होता है? अगर हमारे

अक्सर कहा जाता है कि हम भारतीयों में सेंस आफ ह्यूमर की भारी कमी है।हमारे सांसदों ने यह साबित कर दिया कि यह सही है। जहां तक राजनेताओं का सवाल है वे हमेशा ही कार्टूनिस्टों के निशाने पर रहे हैं आखिर क्यों न रहें? वे देश के भाग्यविधाता जो बन गए हैं और उन्होंने देश का जो हाल बनाया है उसके बारे में सभी जानते हैं। मगर इस देश में लोकतंत्र है और लोगों को अभिव्यक्ति का अधिकार मौलिक अधिकार के तौर पर मिला हुआ है इसलिए वे  व्यंग्यबाण चुपचाप झेलने को मजबूर थे। लेकिन पहला मौका मिलते ही उन्होंने कार्टूनिस्टों को निशाना बना डाला। उनके कार्टूनों को चुन-चुनकर पाठ्यपुस्तकों से निकाल

भारतीय जनगणना रपट 2011 के नवीनतम  आंकड़े जारी होने के बाद मुझसे पूछा गया कि क्यों भारत में इतने सारे मोबाइल है लेकिन पर्याप्त शौचालय नहीं हैं।हालांकि पचास प्रतिशत से ज्यादा लोगों  के पास मोबाइल हैं लेकिन इतने लोगों के यहां शौचालय नहीं हैं। मेरे देश की असाधारण कहानी  में ऐसे विरोधाभास ढ़ेर सारे हैं। विकास रिसकर नीचे की तरफ पहुंच रहा है। लेकिन सरकार ने जिन सेवाओं को मुहैया कराने का वायदा किया है वे तो अब भी नदारद हैं।

यह सही है कि पिछले 10 वर्षों में देश में भारी परिवर्तन आया है। नए उद्यमियों,,ऊर्जावान निजी क्षेत्र  और तेजी से

चमत्कार को सभी नमस्कार करते हैं । फिल्म उद्योग के इस चमत्कार की भी चर्चा भी हर जगह होती रहती है। लेकिन यह चमत्कार हुआ कैसे। कहना न होगा कि चमत्कार अचानक नहीं हुआ है इसकी कहानी लंबी है। कभी फिलमउद्योग में ऐसे निर्माताओं की भरमार थी व्यक्तिगत तौर पर फिल्में बनाते थे। इसके लिए उन्हें कहीं न कहीं से फायनेंस का जुगाड करना पड़ता था।कोई बैंक फिल्मों को फायनेंस नहीं करती थी।  कारण यह था कि कई वर्षो तक फिल्म उद्योग `कानूनी रूप से मान्यता प्राप्त उद्योग ‘ नहीं था। 1951 के इंडस्ट्रीज एक्ट आफ इंडिया में सरकार द्वारा मान्यता  प्राप्त सभी उद्योगों की सूची थी और केवल वही

लड़कों अथवा पुरुषों में ऐसा क्या है जो हमें इतना अधिक आकर्षित करता है कि हम एक समाज के रूप में सामूहिक तौर पर कन्याओं को गर्भ में ही मिटा देने पर आमादा हो गए हैं। क्या लड़के वाकई इतने खास हैं या इतना अधिक अलग हैं कि उनके सामने लड़कियों की कोई गिनती नहीं। हमने जब यह पता लगाने के लिए अपने शोध कीशुरुआत की कि क्यों वे अपनी संतान के रूप में लड़की के बजाय लड़का चाहते हैं तो मुझे जितने भी कारण बताए गए उनमें से एक भी मेरे गले नहीं उतरा। उदाहरण के लिए किसी ने कहा कि यदि हमारे लड़की होगी तो हमें उसकीशादी के समय दहेज देना होगा, किसी की दलील थी कि एक लड़की अपने माता-पिता अथवा अन्य

पिछले दिनों बालीवुड के किंग खान या शाहरूख खान को न्यूयार्क हवाई अड्डे पर हिरासत में ले लिया गया। तब एक एक एफएम रेडियो पर जोक चल रहा था। एंकर कह रहा था कि उनके सूत्रों ने खबर दी है कि शाहरूख खान को इसलिए गिरफ्तार किया गया क्योंकि अमेरिकी अधिकारियों को पता चला था कि शाहरूख अपने सामान में अपनी रा-वन फिल्म की सीडी लेकर अमेरिका जा रहे थे। और अमेरिकी सरकार नहीं चाहती थी कि ऐसी बोर फिल्म अमेरिका तक पहुंचे। इस जोक के जरिये रा-वन के महाबोर होने पर कटाक्ष किया गया था। इन दिनों रा-वन की गणना सबसे बोर और सबसे फ्लाप फिल्म के रूप में हो रही है। लेकिन

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