सार्वजनिक नीति - अन्य लेख

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सीमापार से खबर अच्छी आई है। बांग्लादेश सरकार ने देश में सरकारी सेवाओं में आरक्षण की व्यवस्था को खत्म करने का फैसला किया है। बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना ने 11 अप्रैल को संसद में सरकारी नौकरियों में आरक्षण को खत्म करने का ऐलान किया । बांग्लादेश में आरक्षण नीति के खिलाफ हजारों छात्र विरोध प्रदर्शन कर रहे थे। ढाका यूनिवर्सिटी से आरक्षण व्यवस्था को लेकर आंदोलन शुरू हुआ और धीरे धीरे पूरे बांग्लादेश में फैल गया। प्रदर्शकारियों का पुलिस से टकराव भी हुआ जिसमें 100 से ज्यादा छात्र घायल हुए। सरकार को छात्रों की मांगों के आगे झुकना पड़ा और

मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा का गोपाल कृष्ण गोखले की कोशिश को भले ही ब्रिटिश विधान परिषद ने 18 मार्च 1910 को खारिज कर दिया, लेकिन इसके ठीक 99 साल बाद इतिहास बदला गया। आजाद भारत की संसद ने शिक्षा के अधिकार को संवैधानिक दर्जा देकर स्वतंत्रता सेनानियों के सपने को तो पूरा किया ही, भारतीय भविष्य को बेहतर मानव संसाधन के तौर पर विकसित करने की दिशा में नई राह ही खोल दी। जैसा कि अक्सर होता है, कानूनों के अपने पेंच और प्रावधान भी कई बार अपने मूल उद्देश्यों की राह में रोड़े बनने लगते हैं, शिक्षा का अधिकार कानून भी इसी राह पर चल पड़ा है। इसका असर यह हुआ है

मौजूदा समय में भारतीय शिक्षा के क्षेत्र में नीतियां बनाने, नियमन (रेग्युलेशन) करने और सेवा प्रदान (सर्विस डिलिवरी) करने जैसे सारे सरकारी कामों की जिम्मेदारी एक ही संस्था के जिम्मे है। हालांकि, जरूरत इन सारे कामों को तीन अलग अलग हिस्सों में बांटने की है और इन तीनोँ के बीच संबंधों में वैसी ही स्पष्ट दूरी होनी चाहिए जैसे कि वित्त, टेलीकॉम और विद्युत क्षेत्र में है। ऐसा करने से नीति निर्धारण और नियमन दोनों के श्रेष्ठ क्रियान्वयन के लिए पर्याप्त क्षमता बढ़ेगी जो कि फिलहाल सेवा प्रदान करने की जिम्मेदारी के कारण अवरुद्ध हो जाती है। जिम्मेदारियों को

भारत में चीन, संयुक्त राज्य अमेरिका और यूरोपीय संघ से आने वाले “कोटेड पेपर” पर नई एंटी-डंपिंग जाँच शुरू होने के बारे में बातें चल रही हैं। दक्षिण कोरिया और इंडोनेशिया को इस जाँच से छूट दी गई है। दरअस्ल, ये देश ही ज़ीरो कस्टम ड्यूटी स्टेटस के चलते भारत में सस्ते आयात के लिए ज़िम्मेदार हैं, जैसा कि बल्लारपुर इंडस्ट्रीज़ लि. (बीआईएलटी) के अध्यक्ष ने कंपनी की 2016 और 2017 की वार्षिक रिपोर्ट में कहा है। इस जाँच के चलते कोटेड पेपर के साथ फ़्लेक्सिबल पैकेजिंग, हल्के कोटेड पेपेर और ब्रोशर-पेम्फ़्लेट में इस्तेमाल होने वाले कोटेड पेपेर पर और ज़्यादा शुल्क

- 20-22 अप्रैल 2018 तक उत्तराखंड के जिम कॉर्बेट में चलेगा वर्कशॉप
- पब्लिक पॉलिसी पर आधारित वर्कशॉप में शामिल होने के लिए 31 मार्च तक किया जा सकेगा आवेदन

सेंटर फार सिविल सोसायटी एटलस नेटवर्क के संयुक्त तत्वावधान में आजादी.मी एकबार फिर लेकर आए हैं पत्रकारों के लिए अवार्ड विनिंग सर्टिफिकेट कार्यक्रम ipolicy वर्कशॉप।

“एपीजे अब्दुल कलाम की नई पीढ़ी को आगे बढ़ने का अवसर” देने के लिए द टाइम्स ऑफ इंडिया ने 400 छात्रोँ के लिए स्कॉलरशिप की शुरुआत की है ताकि उन्हे बेहतरीन शिक्षा हासिल हो सके। यह एक सराहनीय कदम है, लेकिन देश की बढ़ती आबादी और शिक्षा प्राप्त करने के उम्मीदवार छात्रोँ को संख्या की तुलना में यह बेहद कम है। यहाँ यह कहना भी जरूरी है कि हमारे देश की आने वाली युवा पीढ़ी अच्छी शिक्षा हासिल करने और अपनी क्षमताओँ के अनुकूल अवसर पाने हेतु धर्मार्थ पर निर्भर नहीं होनी चाहिए। यह सरकार की जिम्मेदारी होनी चाहिए।

पंजाब नेशनल बैंक के मुताबिक नीरव मोदी महाफ्रॉड की रकम 11 हजार चार करोड़ से 1300 करोड़ रूपये और ज्यादा हो सकती है। यानी कुल 12 हजार सात करोड़ का चूना बैंक या सरकार को लग चुका है। इस फ्रॉड के बाद लोगों की जुबान पर बड़ा सवाल यह है कि सरकार हर वो काम क्यों करती है जिससे टैक्स के रूप में वसूली गई लोगों की खून पसीने की कमाई पानी में बह जाए। सरकार का काम देश चलाना है, विदेश नीति और रक्षा मामलों पर ध्यान देना है। बैंक चलाने के लिए प्राइवेट संस्थाएं है जो पहले से ही बैंकों को चला रही है। सरकार प्राइवेट बैंकों पर सेवा शर्तों के लिए निगरानी रख सकती है

मामा मेहुल चौकसी और भांजे नीरव मोदी की जोड़ी ने देश के सरकारी बैंकिंग सिस्टम की जड़ें हिला दी हैं। 11,600 करोड़ से ज्यादा का ये घोटाला आजकल देश में हर किसी की जुबान पर है। कोई इसे चटखारे लेकर बयान कर रहा है तो किसी ने इसे अपनी राजनीति चमकाने का हथियार बना लिया है। हैरत ये है कि कैसे फर्जी गारंटियों के दम पर बैंक कर्मचारियों की मिलीभगत से बैंकिग सिस्टम को भेद नीरव मोदी चूना लगाकर फरार हो गया। अपने आपको गर्व से देश का दूसरा सबसे बड़ा सरकारी बैंक कहने वाला पंजाब नेशनल बैंक अब खिसयाए अंदाज में सफाई दे रहा है। पर क्या ये मुमकिन है कि आज हो रही है

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